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पहरेदारः घर खरीदारों की दिक्कत, कब मिलेगा इंसाफ

प्रकाशित Sat, 15, 2017 पर 15:13  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

सीएनबीसी-आवाज़ पर आने वाला टीवी का सबसे बड़ा कंज्यूमर शो पहरेदार ग्राहक की आवाज़ बुलंद करता है और लड़ता है ग्राहक के हक की लड़ाई। जब कंपनियों की मनमानी के सामने कंज्यूमर झुकने लगता है, तब उनके हक की आवाज़ लेकर पहरेदार करता है कंपनी से सवाल और कंपनी को देना होता है जवाब।


पहरेदार के जरिए उन लोगों को इंसाफ मिल पाता है जो कंपनियों के अड़ियल रवैये के चलते उन जरूरी सर्विसेज से महरूम रह जाते हैं जो उनका हक है। पहरेदार उन कंपनियों को भी सबक सिखाता है जो वादे तो कर देती हैं लेकिन उन्हें पूरे करने में आनाकानी करती हैं।


आज पहरेदार में फोकस है दिल्ली एनसीआर के बेबश घर खरीदारों की आवाज को। उस घर का हक जिसके लिए कोई 2 साल से तो कोई 5 साल से सिर्फ इंतजार किये जा रहा है औऱ इन घर खऱीदारों की आवाज शायद ही कोई सुन रहा है। क्योंकि अगर सुनवाई होती तो  ना इन घर खरीदारों सरकारी बाबाओं के दफ्तर के सामने धरने देने की जरुरत होती और ना ही बिल्डरों के खिलाफ नारेबाजी करने की। अफसोस तो यह है कि जिन्हें पजेशन मिल गया है वह अपने मकान को घर नहीं बना पा रहें क्योंकि उन्हें चार दीवारी तो मिल गई है लेकिन उसके साथ वह सहुलियत नहीं मिली है जिसका वादा बिल्डर ने किया था। जिसके पैसे भी इन्हीं लोगों से वसूले गए है।


हार्टबीट सिटी बायर्स एसोसिएशन के पुनीत पराशर का कहना है कि कब मिलेगा घर, इसका जवाब कोई नहीं दे सकता है। अथॉरिटी के साथ हुई बैठकों का कोई फायदा नहीं मिला। बिल्डर अथॉरिटी की बात भी नहीं सुनता। वैसे भी बिना बिल्डर की मर्जी के कुछ नहीं होता। बिल्डर आपना मन होने पर ही मिलते हैं या बात करते हैं। अब तो इन सभी मुद्दों पर सरकार को सक्रिय भूमिका निभानी होगी। सरकार को बिल्डरों पर निगरानी रखनी चाहिए। 


एनईएफओडब्लयूए मेंबर श्वेता भारती के मुताबिक सिर्फ अथॉरिटी के साथ बैठक का कोई फायदा नहीं है। इन बैठकों में बिल्डर से स्टेटस रिपोर्ट लगातार लेना जरुरी है। हर महीने बिल्डरों के साथ बैठक होनी चाहिए। अब तक इन सभी मसलों में सरकार ने मिलीभगत को नजरअंदाज किया है।


वरिष्ठ वकील साहिल सेठी का कहना है कि सबसे जरुरी है कि फ्लैट बनने शुरु हो। डेवलपर को समझना होगा कि दिक्कतें है। खरीदार को भरोसे में लेना जरुरी है। अगर बिल्डर ना सुने तो लोग कानूनी मदद लें। अदालतों या मध्यस्थता केंद्र की मदद लें। लोगों को एकजुट होकर आवाज उठानी चाहिए। बिल्डरों को टालमटोल नहीं करना चाहिए।