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पहरेदार: रॉयल एनफील्ड - ग्राहक का विश्वास चकनाचूर

प्रकाशित Sat, 07, 2018 पर 15:54  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

सीएनबीसी-आवाज़ पर आने वाला टीवी का सबसे बड़ा कंज्यूमर शो पहरेदार ग्राहक की आवाज़ बुलंद करता है और लड़ता है ग्राहक के हक की लड़ाई। जब कंपनियों की मनमानी के सामने कंज्यूमर झुकने लगता है, तब उनके हक की आवाज़ लेकर पहरेदार करता है कंपनी से सवाल और कंपनी को देना होता है जवाब।


पहरेदार के जरिए उन लोगों को इंसाफ मिल पाता है जो कंपनियों के अड़ियल रवैये के चलते उन जरूरी सर्विसेज से महरूम रह जाते हैं जो उनका हक है। पहरेदार उन कंपनियों को भी सबक सिखाता है जो वादे तो कर देती हैं लेकिन उन्हें पूरे करने में आनाकानी करती हैं।


बुलेट प्रेमियों के लिए रॉयल एनफील्ड बस नाम ही काफी है। आयशर मोटर्स के ब्रांड रॉयल एनफील्ड ने अपनी धड़धड़ाती बुलेट से अच्छा खासा मार्केट शेयर बना रखा है। लेकिन, जब बात आफ्टर सेल्स सर्विस की आती है तो कंज्यूमर एक्सपीरियंस यही बता रहा है कि इस ब्रांड को कड़ा होम वर्क करने की जरूरत है। प्रीमियम मोटरसाइकिल के बाजार में तो बुलेट फास्ट लेन में है, लेकिन इस ग्रोथ का रास्ता कंज्यूमर के विश्वास से होकर गुजरता है। क्यों कंज्यूमर का विश्वास डगमगा रहा है, ये जानते हैं सूरत के समीर देसाई से।


समीर देसाई ने 28 नवंबर 2017 को रॉयल एनफील्ड क्लासिक 350 खरीदी। करीब 2000 किलोमीटर चलने तक बाइक में कोई परेशानी नहीं आई, लेकिन इसके बाद बाइक में तेज वाइब्रेशन और इंजन से आवाज आने लगी। फिर वर्कशॉप में नई बाइक ठीक कराने के लिए दी और कंपनी ने दावा किया कि बाइक में परेशानी दूर हो गई है। कंपनी ने जानकारी दी कि गियर शिफ्ट बदल दिया गया है।


हालांकि कंपनी के दावे के बावजूद बाइक में दिक्कतें खत्म नहीं हुई। दोबारा डीलर से बाइक में खराबी की शिकायत की। सर्विस स्टेशन की दोबारा कोशिश के बाद भी कुछ नहीं हुआ। बाइक में आवाजें आने बंद नहीं हुई और फिर 5 फरवरी 2018 में बाइक सर्विस स्टेशन में ही छोड़ दी।