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रेरा का एक साल, कितना रहा बेमिसाल!

प्रकाशित Fri, 06, 2018 पर 19:18  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

रेरा यानि बिल्डरों की मनमानी पर नकेल कसने वाले उस कानून की जिसका एक साल पूरा होने वाला है। सीएनबीसी- आवाज पड़ताल कर रहा है कि कानून लागू होने के बाद से कितनी रूकी है बिल्डर्स की मनमानी और रेरा से कितने मजबूत हुए हैं घर खरीदरों के अधिकार,लेकिन रेरा को लेकर देश में कुछ कन्फ्यूजन भी है। अभी तक सभी राज्यों में ये कानून पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया है। कुछ राज्य ऐसे हैं जिन्होंने कानून लागू करने से ही मना कर दिया है। कैसा रहा रेरा का एक साल और क्या है सरकार की कोशिश, देखिए इस स्पेशल रिपोर्ट में।
 
बिल्डरों की मनमानी पर नकेल कसने के लिए लागू हुए रेरा को एक साल पूरा होने जा रहा है। लेकिन अभी तक सभी राज्यों में ये कानून पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया है। कुछ राज्य ऐसे हैं जिन्होंने कानून लागू करने से ही मना कर दिया है।


रेरा जैसा कानून पिछली सरकारें भी तो ला सकती थी लेकिन हमारी सरकार ने यह कानून लाकर बिल्डरों की मनमानी पर लगाम लगा दी है। रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी यानि रेरा, एक ऐसा कानून जो लागू होकर भी ठीक तरह से लागू नहीं पा रहा। रेरा आखिर इतना बेचारा क्यों नजर आ रहा है?


26 मार्च 2016 को रेरा नोटिफाई हुआ और इसे 1 मई 2017 से अमल में आया गया। लेकिन अब तक सभी राज्यों में ये कानून पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया है। रेगुलेटरी अथॉरिटी कहीं बनी है तो कहीं नहीं बनी है। अपीलेट ट्रिब्युनल भी सभी राज्यों में नहीं बन पाए हैं। कुछ राज्य ऐसे हैं जिन्होंने कानून लागू करने से ही मना कर दिया है तो कुछ राज्य ऐसे भी हैं जो कानून को कमजोर करके लागू कर रहे हैं।


नियमों के तहत रेरा में बिना रजिस्ट्रेशन के प्रोजेक्ट नहीं बिकेंगे और ना ही उनका विज्ञापन होगा। जरूरी मंजूरियों के बाद ही प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी होगी। बिल्डर को प्रोजेक्ट से जुड़ी हर जानकारी रेरा को देने के साथ-साथ अपनी वेबसाइट पर भी डालनी होगी। साथ ही प्रोजेक्ट के लिए अलग से एस्क्रो अकाउंट भी बनाना होगा जिसमें घर खरीदारों से लिया गया 70 फीसदी पैसा रखना होगा। प्रॉपर्टी ब्रोकर भी रेरा के दायरे में आएंगे। नियमों के तहत बिल्डर को 5 साल तक प्रोजेक्ट की मरम्मत का जिम्मा उठाने का प्रावधान है।


इसके अलावा बिल्डर लेट पेमेंट पर मनमाना जुर्माना भी नहीं वसूल सकते। बिल्डर की मर्जी से डील कैंसिल नहीं होगी और बिल्डर ओपन पार्किंग नहीं बेच सकेंगे। घर खरीदारों के साथ एकतरफा एग्रीमेंट नहीं बनेंगे। रेगुलेटर की बात नहीं मानने पर जुर्माना और जेल की सजा का प्रावधान भी है। बिल्डर पर प्रोजेक्ट की कीमत का 5 से 10 फीसदी तक जुर्माना लगाया जा सकता है।


शहरी विकास मंत्रालय के आंकड़ों पर गौर करें तो अब तक संवैधानिक वजह से पूर्वोत्तर के 6 राज्यों में रेरा लागू नहीं हो पाया है। पश्चिम बंगाल और केरल जैसे राज्यों ने अब तक ये कानून नहीं अपनाया है। सिर्फ 8 राज्यों में परमानेंट रेगुलेटर का गठन किया गया है जबकि 19 राज्यों में अंतरिम रेगुलेटर हैं। सिर्फ गुजरात तमिलनाडु और अंडमान निकोबार में परमानेंट अपीलेट अथॉरिटी है। जबकि 13 राज्यों में अंतरिम अपीलेट अथॉरिटी है। सिर्फ 16 राज्यों में अब तक रेरा रजिस्ट्रेशन की वेबसाइट बनाई गई है। अभी तक पूरे देश में रेरा में महज 27 हजार प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन हो पाया है। जबकि सिर्फ 17 हजार आवेदन एजेंट रजिस्ट्रेशन के लिए प्राप्त हुए हैं।


ये कहना गलत नहीं होगा कि बिल्डरों की मनमानी पर नकेल कसने के लिए बनाए गए रेरा में काम धीमी गति से चल रहा है। घर खरीदारों को इंसाफ दिलाने के लिए इसमें तेजी लाने के साथ-साथ इसे ठीक तरह से लागू करने की जरूरत है।