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डिफेंस में सिंगल विंडो क्लियरेंस जल्द: सूत्र

प्रकाशित Mon, 15, 2017 पर 14:12  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

डिफेंस सेक्टर में काम करने वाली निजी कंपनियों को जल्द ही बड़ी राहत मिल सकती है। सीएनबीसी-आवाज़ को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक सरकार जल्द ही डिफेंस सेक्टर में निजी कंपनियों के लिए लाइसेंस के नियम आसान करने वाली है। इसके अलावा डिफेंस सेक्टर में निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए क्या है सरकार की कोशिशें बता रहे हैं लक्ष्मण रॉय।


देश की रक्षा के लिए विदेशों पर निर्भरता कम से कम हो इसके इंतजाम अब तेजी से किए जा रहे हैं। निजी कंपनियां बड़े पैमाने पर निवेश करें और डिफेंस से जुड़़े सामान बनाएं इसके लिए उन्हें हर मुमकिन सहूलियतें मुहैया कराने कोशिश हो रही है। इसी कोशिश के तहत लाइसेंस के नियम आसान किए जा सकते हैं।


सूत्रों के मुताबिक सरकार एक ऐसे प्रस्ताव पर विचार कर रही है जिसके तहत डिफेंस सेक्टर में कारोबार के लिए कंपनियों को सिर्फ उद्योग मंत्रालय के तहत आने वाले डीआईपीपी यानी डिमार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्रियल पॉलिसी एंड प्रोमोशन से लाइसेंस लेना होगा। इंडस्ट्रीज (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट, 1951 के तहत ऐसा प्रावधान किया जा रहा है। इसके लिए गृह मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय को तय समय सीमा में नो ऑबजेक्शन सर्टिफिकेट यानी एनओसी देना होगा।


सूत्रों के मुताबिक पिछले हफ्ते प्रधानमंत्री कार्यालय में इस मुद्दे पर संबंधित मंत्रालयों की एक अहम बैठक भी हो चुकी है। दरअसल, लाइसेंस के मौजूदा नियमों में बदलाव के पीछे असली वजह ये है कि करीब 11 महीने से डिफेंस सेक्टर में कोई लाइसेंस जारी ही नहीं किया गया है जबकि कई आवेदन लंबित हैं।


दरअसल, सरकार ने 2001 में निजी कंपनियों को डिफेंस सेक्टर में कारोबार की इजाजत दी थी। तब लाइसेंस देने का अधिकारी सिर्फ उद्योग मंत्रालय के पास था। तब से लेकर जून 2016 तक 205 लाइसेंस दिए भी गए। लेकिन जुलाई 2016 में आर्म्स रूल 2016 के तहत आदेश जारी किया गया। लाइसेंस देने का अधिकार गृह मंत्रालय को दे दिया गया। तब से लेकर अब तक कोई लाइसेंस जारी नहीं किया गया।


यहां तक कि अगस्त 2016 से लेकर अब तक इंडस्ट्रियल लाइसेंसिग कमेटी की कोई बैठक भी नहीं हुई है। यही वजह है कि अब ये अधिकारी डीआईपीपी को देने को लेकर सरकार गंभीर है। इसके अलावा डिफेंस से जुड़े सामान खरीदने के लिए एक अलग एजेंसी बनाने और विदेशी कंपनियों के साथ घरेलू कंपनियों की स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप पॉलिसी भी सरकार जल्द लाने वाली है।