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जजों के विवाद को सुलझाने की कोशिशों को झटका

प्रकाशित Sat, 13, 2018 पर 14:50  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

सरकार एक तरफ कह रही है कि वो जजों के विवाद में दखल नहीं देगी। मगर दूसरी ओर वो इस कोशिश में लगी भी हुई है। आज पीएम के प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा से मिलने गए, मगर चीफ जस्टिस ने उनसे मिलने से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट में जजों के बीच चल रहे विवाद के बीच प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा चीफ जस्टिस से मिलने उनके घर पहुंचे थे लेकिन उन्हें गेट से ही ये कह कर वापस भेज दिया गया कि प्रधान सचिव ने पहले से मुलाकात का समय नहीं लिया था। इसके बाद प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा को बिना मिले ही चीफ जस्टिस के घर से लौटना पड़ा।


औपचारिक रूप से सरकार ने जजों के विवाद पर चुप्पी साध रखी है, मगर अनौपचारिए रूप से इस विवाद को सुलझाने की पूरी कोशिश कर रही है। सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने विवाद के जल्द ही सुलझने की उम्मीद जताई है। साथ ही उन्होंने साफ किया है कि सरकार का इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं होगा और जज खुद बैठकर विवाद को खत्म करेंगे।


सरकार भले इस मामले पर चुप्पी साधे हुए है लेकिन बीजेपी के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने चार जजों का सपोर्ट किया है। उन्होंने कहा कि भले इस मामले में दखल देना सरकार का काम नहीं है, लेकिन चार जजों ने जो बात कही है, उसे सुनने और उस पर फैसला लेने की जरूर जरूरत है।


दरअसल कल देश के इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट के 4 सिटिंग जज मीडिया के सामने आए। इन जजों ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की साख खतरे में है। उसके कामकाज में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। उन्होंने मीडिया के जरिए देश की जनता को न्यायपालिका को बचाने की गुहार लगाई।


जस्टिस चेलमेश्वर, जस्टिस मदन लोकुर, जस्टिस कुरियन जोसेफ, जस्टिस रंजन गोगोई ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के कामकाज पर सवाल उठाए। जजों ने मुख्य न्यायधीश को चिट्ठी भी लिखी और उन्होंने वही चिट्ठी मीडिया को भी दी। जजों ने कहा कि लोकतंत्र खतरे में है और अगर सुप्रीम कोर्ट नहीं बचेगा तो लोकतंत्र भी नहीं बचेगा।