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बजट में खत्म होगा नौकरी का इंतजार!

प्रकाशित Fri, 12, 2018 पर 18:43  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

आईटी हो या बैंकिंग सेक्टर, टेक्सटाइल हो या स्टार्टअप्स, देशभर में नए और पुराने सेक्टरों में नौकरियों पर खतरा मंडरा रहा है। बड़ी तादाद में रोजगार देने वाले टेक्सटाइल, मैन्युफैक्चरिंग और आईटी जैसे सेक्टर्स की हालत खराब है और एक बार नौकरी जाने पर दोबारा नौकरी मिलना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में इंडस्ट्री के साथ साथ आम आदमी की नजर भी अब वित्त मंत्री पर टिक गई हैं। क्या वित्त मंत्री बजट में नौकरियों का पिटारा खोलेंगे। क्या नई नौकरियां पैदा करने के लिए कोई पॉलिसी आएगी और कैसे सरकार रोजगार देने का वादा पूरा करेगी।


आईटी सेक्टर के हालात पर, जहां बड़ी तादाद में नौकरियां जा रही हैं। पिछले एक साल में हजारों कर्मचारियों की छंटनी हो चुकी है। सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या इस बार बजट में आईटी सेक्टर को मुश्किलों से उबारने की कोशिश होगी ।


पुणे के रहने वाले हरप्रीत सिंह को अंदाजा नहीं था कि जिस आईटी कंपनी में उन्होंने इतने साल गुजारे, वही कंपनी इन्हें रातोंरात बाहर कर देगी । कंपनी ने पहले तो इन पर खुद नौकरी छोड़ने का दबाव डाला, लेकिन नहीं मानने पर एक दिन बाहर का रास्ता दिखा दिया। कंपनी ने इन्हें ब्लैकलिस्ट करने की धमकी भी दी। छंटनी की तलवार हरप्रीत जैसे हजारों कर्मचारियों पर गिरी।


छंटनी की मार झेलने वाले हरप्रीत अकेले नहीं हैं। एक अनुमान के मुताबिक पिछले एक साल में आईटी सेक्टर की सात बड़ी कंपनियों में करीब 70 हजार लोगों को नौकरी से हाथ धोना पड़ा है। इनमें देश की दिग्गज आईटी कंपनियां शामिल हैं ।


मसलन इंफोसिस को 9 हजार लोगों की छंटनी करनी पड़ी। इसी तरह कॉग्निजेंट ने 6 हजार और वेरिजॉन ने 2,100 लोगों को बाहर का रास्ता दिखाया। आने वाले समय में हालात और भी नाजुक होने के आसार हैं।


भारत के आईटी सेक्टर में छंटनी की मुख्य वजह हैं अमेरिका की संरक्षणवादी नीतियां, कंपनियों की विस्तार योजनाओं पर रोक और ऑटोमेशन और आर्टिफिशियल एंटेलिजेंस का चलन। वर्ल्ड बैंक के एक सर्वे के मुताबिक ऑटोमेशन के कारण भारत में 66 फीसदी नौकरियों पर खतरा मंडरा रहा है। इसका असर सिर्फ बंग्लुरु और गुरुग्राम जैसे टेक हब में ही नहीं बल्की आईटी कॉलेजों में भी देखने को मिल रहा है। ज्यादातर बी-ग्रेड कॉलेजों में प्लेसमेंट के लिए या तो कंपनियां आई ही नहीं या फिर जहां कंपनियां पहुंचीं वहां सैलरी काफी कम ऑफर की।


हालांकि इसके पीछे शिक्षण संस्थानों का गिरता स्तर और कंपनियों की बदलती जरूरतों के मुताबिक पढ़ाई का नहीं होना भी एक बड़ी वजह है। प्लेसमेंट के लिए जो कंपनियां आती हैं उन्हें जिस तरह के टेलेंट की जरूरत होती है वो कॉलेज में नहीं मिलता।


छंटनी ने बंग्लुरु, गुरुग्राम और हैदराबाद जैसे आईटी हब्स की रौनक कम कर दी है। साथ ही डिजिटल इंडिया की वजह से रोजगार पैदा करने के दावे भी छोटे लग रहे हैं। ऐसे में वित्त मंत्री को आईटी सेक्टर में नई नौकरियों पैदा करने पर कोई प्लान लाना होगा। तभी इंडस्ट्री के हालात सुधरेंगे।