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यूपी: अब सीबीआई करेगी उन्नाव रेप केस की जांच

प्रकाशित Thu, 12, 2018 पर 16:27  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

यूपी सरकार ने उन्नाव गैंगरेप केस की सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी है। यूपी के प्रमुख सचिव गृह और डीजीपी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सीबीआई जांच की सिफारिश का ऐलान किया। इसके साथ ही यूपी के डीजीपी ओपी सिंह ने आरोपी विधायक कुलदीप सेंगर की गिरफ्तारी की जिम्मेदारी सीबीआई पर छोड़ दी है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान डीजीपी ने साफ कह दिया कि विधायक कुलदीप सेंगर पर सिर्फ आरोप हैं और वो अभी आजाद हैं। उनकी गिरफ्तारी पर फैसला सीबीआई करेगी हालांकि पीड़ित के पिता की मौत के मामले में प्रमुख सचिव गृह ने पुलिसवालों की लापरवाही की बात जरूर मानी। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि आरोपी विधायक के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं और सिर्फ एसआईटी को दिए गए पीड़ित परिवार के बयान के आधार पर पोस्को के तहत केस दर्ज किया गया है।


पोस्को ने एमएलए सेंगर की मुसीबत बढ़ा दी है। पीड़ित नाबालिग है इसलिए कुलदीप सिंह पर पोस्को एक्ट लगाया गया है कम से कम सात वर्ष तक जेल की सज़ा हो सकती है। इसमें उम्र कैद तक की सज़ा हो सकती है। पीड़ित का एक बार का बयान ही केस के लिए काफ़ी। कुलदीप सेंगर को ही ख़ुद को बेगुनाह साबित करना होगा। आरोपी एमएलए की तुरन्त गिरफ़्तारी हो सकती है। पोस्को ऐक्ट के तहत आरोप ग़ैर ज़मानती होता है।


वहीं यूपी के गृह सचिव अरविंद कुमार ने कहा है कि पारदर्शिता से मामले की जांच कराने के लिए ही केस को सीबीआई को सौंपा गया है। यूपी के डीजीपी ओ पी सिंह ने कहा है कि केस को सीबीआई को सौंपा गया है, सीबीआई जो ठीक समझेगी वो करेगी।


उधर उन्नाव रेप केस में सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पूछा है कि आरोपी विधायक को गिरफ़्तार किया जाएगा या नहीं।


इससे पहले बीती रात उन्नाव रेप केस में आरोपी कुलदीप सिंह लखनऊ में एसएसपी दफ्तर पहुंचे थे और सरेंडर का ड्रामा किया। बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर एसएसपी दफ्तर के भीतर तो गए लेकिन तुरन्त बाहर आ गए। एसएसपी दफ्तर के बाहर जुटे मीडिया वालों को सफाई देने के बाद विधायक कुलदीप सिंह बिना सरेंडर किए ही अपने समर्थकों के साथ वहां से निकल गए।