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आवाज़ अड्डा: अमरनाथ हमला, एक्शन मांगे देश

प्रकाशित Tue, 11, 2017 पर 20:41  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

अमरनाथ यात्रियों पर आतंकवादियों का हमला सुरक्षा की भारी चूक है या फिर सरकार की सख्त कार्रवाई से तिलमिलाए आतंकवादियों की बौखलाहट आप कुछ भी मान लीजिए लेकिन सच्चाई ये है कि 7 निर्दोष लोगों की जान गई है सब इस घटना की निंदा कर रहे हैं लेकिन सरकार सिर्फ कड़ी निंदा करके पल्ला नहीं झाड़ सकती है, उसको जवाबदेही तय करनी होगी और कड़ी कार्रवाई करनी होगी, देश के जज्बात अब इसे और सहन करने के मूड में नहीं हैं कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक लोगों में जबरदस्त गुस्सा है, आवाज अड्डा में आज इसी पर चर्चा होगी लेकिन पहले जान लेते हैं आज क्या हुआ?


अमरनाथ यात्रियों पर आतंकवादी हमले के बाद पूरे देश में हाई अलर्ट है। कल हमले में 7 यात्रियों की मौत हो गई थी। हमले के बाद केंद्र हरकत में है। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने हाई लेवल मीटिंग की है। पीएम को भी मामले की जानकारी दी गई है। इस बीच, आर्मी चीफ बिपिन रावत और गृह मंत्रालय की टीम श्रीनगर रवाना हो गई है। हमले के पीछे लश्कर और पाकिस्तानी आतंकवादी इस्माइल बताया जा रहा है। इस हमले में 32 लोग घायल भी हुए हैं। पता चला है कि जिस बस पर हमला हुआ वो श्राइन बोर्ड के पास रजिस्टर्ड नहीं थी। कल आतंकवादियों ने खन्नाबल में सुरक्षाबलों पर भी दो जगह हमले किए। इस बीच अमरनाथ यात्रियों ने भी आतंकवादियों को करारा जवाब दिया है। हमले के बावजूद आज सुबह अनंतनाग से 3000 यात्री अमरनाथ के लिए निकले।


आतंकवादी हमले से आहत प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया कि जम्मू-कश्मीर में अमरनाथ यात्रियों पर हमला काफी पीड़ादायक है। इसको शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। हर किसी को इसकी कड़ी निंदा करनी चाहिए। अमरनाथ यात्रा पर आतंकवादी हमले की गृहमंत्री ने भी कड़ी निंदा की है। उन्होंने हमले की निंदा करने के लिए कश्मीर के लोगों को भी सलाम किया है। उधर आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद का कहना है कि अमरनाथ की यात्रा जारी रहेगी, वो आतंकवाद के सामने नहीं झुकेंगे।


हमले में मारे गए यात्रियों को जम्मू-कश्मीर सरकार ने 6-6 लाख रुपये और घायलों को 2-2 लाख रुपये का मुआवजा देने का एलान किया है। हमले में मारे गए लोगों के शव वायुसेना के विशेष विमान से सूरत लाए गए हैं। गुजरात सरकार ने भी मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा देने का एलान किया है।


विपक्ष ने भी हमले की निंदा करते हुए सरकार पर हमला बोला है। कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए गुलाम नबी आजाद ने सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया तो वहीं सीताराम येचुरी ने कहा कि इससे पहले भी अमरनाथ यात्रा पर हमले के वक्त बीजेपी की ही सरकार थी।


सावन महीने का पहला दिन, वो भी सोमवार और देर शाम, अमरनाथ यात्रियों पर आतंकवादी हमलों की खबर। देखते-देखते ट्विटर और फेसबुक पर अमरनाथ यात्रा अटैक ट्रेंड करने लगा। सुबह होते-होते पूरे देश में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया। मंगलवार को जब मारे गए यात्रियों के शव सूरत पहुंचे, तब जम्मू-कश्मीर समेत देश के अलग-अलग हिस्सों में हमले के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे थे। लोग सरकार से मांग कर रहे हैं कि वो कड़ी निंदा से आगे बढ़कर तुरंत ठोस कार्रवाई करे। लेकिन सरकार ने ना सिर्फ एक बार फिर कड़ी निंदा और धैर्य का सहारा लेने का संदेश दिया, बल्कि इस बात पर संतोष जाहिर किया कि कश्मीर के तमाम वर्गों ने अलगाववाद की भावना से ऊपर उठकर, हमले की निंदा की।


विपक्ष सरकार से हिसाब मांग रहा है कि 25 जून को खुफिया सूचना में अमरनाथ यात्रा पर हमले की साफ-साफ अलर्ट मिलने के बावजूद ये घटना कैसे हुई। बिना रजिस्ट्रेशन वाली बस, नियमों के खिलाफ अंधेरी रात में हाईवे पर कैसे चल रही थी। इतना ही नहीं विपक्ष मौजूदा सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रहा है।


सवाल है कि क्या वाकई जम्मू-कश्मीर की बीजेपी-पीडीपी गठबंधन सरकार अपना इकबाल खो चुकी है? सवाल ये भी है कि क्या आतंकवादी अमरनाथ जैसे भावुक मुद्दे को कुरेद कर देश में उन्माद पैदा करना चाहते हैं? ऐसे में चौतरफा दबाव में केंद्र सरकार क्या कदम उठाएगी? क्या हमले की निंदा से आगे निकलकर मोदी सरकार अमरनाथ के मुजरिमों पर एक्शन लेगी!