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एक्टिव फंड vs पैसिव फंड, कहां मिलेगा मुनाफा

प्रकाशित Fri, 08, 2017 पर 13:44  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

म्युचुअल फंड में निवेश करना काफी नही, ये काम काज कैसे करते हैं, आपके फंड में क्या बदलाव हो रहे हैं, उसमें किस तरह के स्टॉक का मिक्स है, उनमें उतार चढाव कैसा है, इन सब की जानकारी रखने से आप एक जागरूक निवेश बन सकते हैं। आज हमारे साथ मौजूद हैं बजाज कैपिटल के ग्रुप डायरेक्टर अनिल चोपडा।


अनिल चोपडा का कहना है कि एक्टिव फंड vs पैसिव फंड में अंतर करना आसान हैं। फंड मैनेजर्स, एक्टिव फंड को मैनेज करते हैं। एक्टिव फंड में रिबैलेंसिंग की जरूरत होती है जबकि पैसिव फंड में इंडेक्स की तरह काम करते हैं। स्टॉक्स में बदलाव से रिबैलेंसिंग की जरूरत होती है। ईटीएफ या इंडेक्स फंड पैसिव फंड के उदाहरण है।


अनिल चोपडा के मुताबिक बाजार में उतार-चढ़ाव के हिसाब से एक्टिव फंड में निवेश किया जाता है। इसमें मैनेजर स्कीम से इक्विटी और फिक्सड इनकम में निवेश कर सकेगा। वहीं पैसिव फंड में फिक्सड इनकम विकल्प का मौका नहीं होता।


रिटर्न के आधार पर अगर इन दोनों ही फंड्स के फर्क को समझना हो तो पैसिव फंड पर रिटर्न इंडेक्स जैसे ही मिलते है। एक्टिव फंड बेंचमार्क से बेहतर रिटर्न दे सकते हैं। निवेश के लिए रिस्क क्षमता होनी चाहिए। दोनों कैटेगरी के फंड में रिस्क रहता है। इसलिए लंबी अवधि में निवेश के लिए पैसिव फंड का चुनाव ही सहीं होता है।


एक्टिव फंड में निवेश पर 2.25-2.50 फीसदी चार्ज लगता है जबकि पैसिव फंड में निवेश पर 0.50-0.75 फीसदी चार्ज लगता है।