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म्युचुअल फंडः निवेश पर लिमिट का पहरा, मिलेगा फायदा!

प्रकाशित Fri, 08, 2017 पर 14:20  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

अक्सर आपने सुना होगा, म्युचुअल फंड ने निवेश पर रोक लगा दी है या केवल एसआईपी या एकमूश्त रकम के जरिए निवेश पर कैप लगा दी है। इस स्थिति में बतौर निवेशक आप घबरा तो जाएंगे ही, लेकिन घबराने के तो काम चलेगा नही। ये समय होता है निवेश में बदलाव करने का लेकिन, ये कैसे करना चाहिए, और साथ ही जरूरी है ये समझना के म्युचुअल फंड ऐसा करते क्यों हैं। आज हमारे साथ हैं एटिका वेल्थ मैनेजमेंट के डायरेक्टर और चीफ फाइनेंशिल प्लानर निखिल कोठारी।


निखिल कोठारी का कहना है कि मिरए एसेट इमर्जिंग ब्लूचिप और आईडीएफसी फोकस्ड इक्विटी ने म्युचुअल फंड में निवेश में कैप लगाया है। इसमें अधिकतम 25,000 रुपये की एसआईपी करने की सीमा रखी गई है। मिरए एसेट में महीने में एक ही बार निवेश संभव है। हर महीने 10 तारीख को मिरए में एसआईपी संभव है। हालांकि मिरए एसेट में निवेश पर कैप 15 दिसंबर से लागू होगा। मिरए एसेट में एकमुश्त निवेश पहले से ही बंद कर दिया गया है।


वहीं आईडीएफसी फोकस्ड इक्विटी में अधिकतम 2 लाख ही निवेश होगा। आईडीएफसी फोकस्ड इक्विटी में निवेश स्विच करने पर 2 लाख तक निवेश कर सकते है। मल्टीकैप फंड में एकमुश्त निवेश सीमित करने के लिए कदम उठाया गया है। अच्छी मिडकैप कंपनियों में निवेश के विकल्प कम है।  मिरए एसेट इमर्जिंग ब्लूचिप मल्टीकैप फंड है। मिरए एसेट इमर्जिंग ब्लूचिप मिडकैप कैटेगरी में बेहतरीन फंड है। 


निवेश पर सीमा क्यों? इस सवाल पर निखिल कोठारी का कहना है कि,फंड में मैनेज की जाने वाली कुल रकम ही एसेट है।  फंड के साइज का फंड के प्रदर्शन पर फर्क नहीं होता है। साइज बड़ा होने से फंड मैनेजर के लिए फ्लेक्सीबिलिटी ज्यादा होती है। हालांकि लार्जकैप में लिक्विडिटी से फंड के साइज से बड़ा फर्क नहीं होता है। स्मॉलकैप और मिडकैप स्टॉक्स में लिक्विडिटी ज्यादा नहीं है। ज्यादा नकदी होने से फंड मैनेजर के पास विकल्प ज्यादा होते है। निवेशकों को मिलने वाले रिटर्न सुरक्षित करने का प्रयत्न रहता है। जिसके चलते इस फंड में मौजूदा निवेशक बने रहें क्योंकि इससे फंड के प्रदर्शन पर असर नहीं होगा। नए निवेशक पर बदलाव का असर पड़ता है।