म्युचुअल फंड पर सेबी का शिकंजा, क्या है इंडस्ट्री की मुसीबत -
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म्युचुअल फंड पर सेबी का शिकंजा, क्या है इंडस्ट्री की मुसीबत

प्रकाशित Wed, 13, 2016 पर 16:31  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

मार्केट रेगुलेटर सेबी ने म्युचुअल फंड इंडस्ट्री पर डंडा चला दिया है। सेबी ने कहा है कि म्युचुअल फंडों को फंड स्कीम के बारे में और ज्यादा डिस्क्लोजर देने होंगे। उन्हें बताना होगा कि वो डिस्ट्रीब्यूटर्स को कितना कमीशन देते हैं। साथ ही उन्हें सीईओ, सीओओ की सैलरी भी अपनी वेबसाइट पर डालनी होगी। सेबी को लगता है कि इससे म्युचुअल फंड में पारदर्शिता बढ़ेगी। लेकिन इंडस्ट्री को लगता है कि इससे उसकी परेशानियां और बढ़ेंगी। म्युचुअल फंड इंडस्ट्री सेबी पर भेदभाव का आरोप लगा रही है। हमने खास चर्चा के जरिए यही समझने की कोशिश की है कि म्युचुअल इंडस्ट्री को क्या परेशानी हो रही है। और सबसे बड़ी बात कि इसमें आम निवेशक का क्या फायदा होने जा रहा है।


सेबी ने म्युचुअल फंड हाउसेज पर शिकंता कसते हुए निर्देश दिया है कि उन्होंने डिस्ट्रिब्यूटर को कितना कमीशन दिया। साथ ही म्युचुअल फंड हाउसेज को डिस्ट्रिब्यूटर गिफ्ट. रिवार्ड, विदेश यात्रा और स्पॉन्सरशिप के बारे में भी बताना होगा। म्युचुअल फंड हाउसेज को स्कीम का कुल एक्सपेंस रेश्यो बताना होगा। म्युचुअल फंड हाउसेज की ओर से सेबी को हर महीने में ये सारी जानकारियां देनी होगी। अभी म्युचुअल फंड हाउसेज को सेबी को सिर्फ स्कीम, यूनिट और मार्केट वैल्यू बताना पड़ता है।


यही नहीं सेबी ने म्युचुअल फंड़ों को निर्देश दिया है कि वो सीईओ, सीओओ और सीआईओ की सैलरी भी वेबसाइट डालनी होगी। साथ ही 60 लाख रुपये से ज्यादा सैलरी वाले कर्मचारियों के नाम बताने होंगे। म्युचुअल फंड़ों को ये जानकारी वित्त वर्ष खत्म होने के 1 महीने के अंदर देनी होगी। सेबी के नए नियमों के मुताबिक म्युचुअल फंडों को ऑफर डॉक्यूमेंट में फंड मैनेजर का नाम देना होगा। फंड मैनेजर कितने समय तक फंड मैनेज करेगा ये बताना होगा। स्कीम में बोर्ड मेंबर्स, फंड मैनेजर और मुख्य कर्मचारियों का निवेश बताना होगा।


म्युचुअल फंड इंडस्ट्री ने सेबी पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा है कि दूसरे प्रोडक्ट के लिए इतने कड़े नियम नहीं हैं। नए नियमों से निवेशक और डिस्ट्रीब्यूटर के बीच भरोसा घटेगा। नए नियमों से डिस्ट्रीब्यूटर और निवेशकों के बीच लेन-देन शुरू हो सकता है। वहीं कमीशन के डिटेल देने से निवेशकों के मन में शक पैदा होगा। म्युचुअल फंड इंडस्ट्री के मुताबिक रेगुलेटर को डायरेक्ट प्लान पर जोर नहीं देना चाहिए। साथ ही एकाध देशों को छोड़कर कमीशन बताने के नियम कहीं नहीं है। नए नियमों से डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को बड़ा करने में दिक्कत होगी और नए निवेशकों को बाजार में लाना मुश्किल होगा।


हालांकि सेबी का मानना है कि नए नियमों से पारदर्शिता बढ़ेगी और इससे ग्राहकों को फायदा होगा। नए नियमों से निवेशक को म्युचुअल स्कीम की पूरी जानकारी मिल सकेगी। साथ ही निवेशक स्कीम में निवेश पर ज्यादा बेहतर फैसले कर पाएगा।


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