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म्युचुअल फंड पर सख्ती, क्या होगा असर!

प्रकाशित Fri, 15, 2017 पर 13:47  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

आने वाले दिनों में हो सकता है कि कई सारी म्युचुअल फंड स्कीम बंद हो जाए। सेबी पैनल ने सिफारिश कि है एक म्युचुअल फंड हाउस की एक जैसी स्कीम बंद की जानी चाहिए। अगर सेबी की चली तो आने वाले दिनों में म्युचुअल फंड स्कीम घटकर आधी रह सकती है। फिलहाल इस वक्त करीब 2000 म्युचुअल फंड स्कीम बाजार में है। म्युचुअल फंड स्कीम को लेकर क्या है सेबी की सिफारिशें और इसका निवेशकों पर कैसा होगा असर, क्या उन्हें डरने की जरूरत है बात करने के लिए हमारे साथ हैं रूंगटा सेक्योरिटीज के डायरेक्टर हर्षवर्धन रूंगटा। 


हर्षवर्धन रूंगटा का कहना है कि सेबी पैनल की सिराफिश के चलते म्युचुअल फंड्स घटाकर आधे करने की तैयारी की जा रही है। सेबी पैनल ने एक कैटगरी में एक जैसी स्कीम्स बंद करने का सुझाव दिया गया है। फिलहाल 2000 से ज्यादा तरह की म्युचुअल फंड्स स्कीम है जिसमें इक्विटी, डेट, हाइब्रिड, कैटेगराइज्ड करने की सिफारिश की गई है। इक्विटी में लार्जकैप, मल्टीकैप, मिडकैप, स्मॉलकैप जैसी सबकैटेगरी रखने और डेट में लिक्विड, अल्ट्रा शॉर्ट टर्म, और डायनमिक जैसी कैटेगरी रखने की सिफारिश की गई है।


अगर सेबी पैनल की सिफारिशे मानी जाती है तो एक म्युचुअल फंड हाउस की एक जैसी कई स्कीमें बंद हो सकती है। एक जैसी स्कीमों को मर्ज किया जाएगा। जिसके बाद म्युचुअल फंड स्कीमों की संख्या घटकर आधी हो जाएगी।


मौजूदा समय में म्युचुअल फंड की करीब 2 हजार स्कीमें बाजार में है। जिनमें से 42 फंड हाउस 20.6 लाख करोड़ के एसेट्स मैनेज कर रहे हैं।


हर्षवर्धन रूंगटा के मुताबिक अगर सेबी पैनल की सिफारिश लागू होती है तो इसका फायदा नए निवेशकों को मिल सकता है। सबसे पहले वह 2000 इन्वेस्टमेंट स्कीमों की लिस्ट से छुटकारा पा सकेंगे। एक कैटेगरी में आने वाले फंड्स को लेकर सफाई रहेगी और निवेशकों को निवेश में सुविधा होगी। एक जैसी कई स्कीम के ना होने से फंड चुनना आसान होगा।


हालांकि म्युचुअल फंड के पुराने निवेशक घबराए नहीं क्योंकि स्कीम बंद नहीं होनेवाली बल्कि वह एक-दूसरे में मर्जर हो सकती है। मर्ज हुए फंड में बिना किसी बदलाव के निवेश जारी रख सकेंगे। साथ ही मर्ज हुए फंड में निवेश पर कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं लगेगा। स्कीम मर्ज होने से टैक्स पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। कैपिटल गेन फंड खरीदने की तारीख से ही जोड़ा जाएगा ना कि मर्ज होने की तारीख से नहीं। मर्ज हुए फंड से असंतुष्ट होने पर निवेश स्विच कर सकेंगे। स्विच करने पर कैपिटल गेन पर टैक्स लगेगा।