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योर मनीः म्युचुअल फंड पर सेबी की सख्ती, बढ़ेगी पारदर्शिता!

प्रकाशित Tue, 10, 2017 पर 12:27  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

निवेशकों के बीच म्युचुअल फंड को लेकर उलझन खत्म करने के मकसद से सेबी ने सख्त कदम उठाएं हैं। सेबी ने पारदर्शिता बढ़ाने और एकरूपता लाने के लिए कैटेगरी तय कर दी है। हर एक सब कैटेगरी में एक से ज्यादा स्कीम की इजाजत नहीं दी जाएगी। इसके अलावा मार्केट कैप के हिसाब से ही कैटेगरी तय होगी। 100 सबसे बड़ी कंपनियों को लार्ज कैप माना जाएगा। वहीं 100 से 250 नंबर की कंपनियों को मिडकैप और उससे बाद की कंपनियों को स्मालकैप माना जाएगा।


म्युचुअल फंड को किसी एक कैटेगरी की एक से ज्यादा स्कीम को मर्ज करना होगा। सेबी ने इक्विटी फंड के लिए 10, डेट के लिए 16 और हाइब्रिड फंड के लिए 6 कैटेगरी तय की हैं। योर मनी पर इस पर विस्तार से बात करने के लिए मौजूद है कोटक महिंद्रा एएमसी के एमडी नीलेश शाह और ऑप्टिमा मनी मैनेजर्स के मैनेजिंग डायरेक्टर पंकज मठपाल।


नीलेश शाह का कहना है कि सेबी का यह फैसला निवेशकों के लिए काफी फायदेमंद होगा। फिलहाल बाजार में 2000 के करीब म्युचुअल फंड है। सिर्फ लॉर्जकैप कैटेगरी में ही कई फंड है। जिसके कारण निवेश करने में इन्वेस्टर्स को काफी दिक्कतें होती है। सेबी के इस फैसले की जरुरत बाजार को थी। निवेशक को स्कीम में निवेश की जानकारी रहेगी।


उन्होंने आगे कहा कि कई मिडकैप फंड्स में कोई लिमिट नहीं थी जिसके कारण बड़ी रेंज में निवेश की क्षमता से कई फंड का प्रदर्शन अच्छा रहता था। लेकिन सेबी के इस फैसले के बाद लिमिटेशन की वजह से कई फंड की परफॉर्मेंस पर असर देखने को मिल सकता है। सेबी के फैसले से लिमिटेशन से छुटकारा मिलेगा और सभी फंड के लिए एक जैसे नियम होगे। दुनिया भर के प्रोविडेंट फंड, पेंशन फंड इक्विटी में निवेश करते हैं। निवेशकों में जानकारी बढ़ी है। जिसके चलते सही एसेट एलोकेशन हो रहा है।


पंकज मठपाल का कहना है कि सेबी के इस फैसले से पुराने निवेशक घबराएं नहीं क्योंकि मर्ज हुए फंड में बिना किसी बदलाव के निवेश जारी रख सकेंगे। मर्ज हुए फंड में निवेश पर कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं लगाया जायेगा और ना ही स्कीम मर्ज होने से टैक्स पर कोई फर्क पड़ेगा। उन्होंने आगे कहा कि कैपिटल गेन फंड खरीदने की तारीख से ही जोड़ा जाएगा, मर्ज होने की तारीख से नहीं है। मर्ज हुए फंड से असंतुष्ट होने पर निवेश स्विच कर सकेंगे। स्विच करने पर कैपिटल गेन पर टैक्स लगेगा। इसमें पारदर्शिता और एकरूपता बढेगी और स्किम मर्ज होने पर टैक्स नही लेगेगा। साथ ही कॉरपस खडा करना भी आसान होगा।