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म्युचुअल फंड निवेश में बढ़ेगी पारदर्शिता

प्रकाशित Mon, 09, 2017 पर 13:47  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

म्युचुअल फंड में निवेश पर हेराफेरी खत्म करने के लिए सेबी ने सख्त कदम उठाए हैं। सेबी ने पारदर्शिता बढ़ाने के लिए के लिए कैटेगरी तय कर दी है। अब एक कैटेगरी में एक से ज्यादा स्कीम की इजाजत नहीं दी जाएगी। इसके अलावा मार्केट कैप के हिसाब से ही कैटेगरी तय होगी।


सेबी ने जो सर्कुलर जारी किया है उससे म्युचुअल फंड में निवेश को लेकर ग्राहकों को फायदे होंगे। अब एक कैटेगरी में एक स्कीम की अनुमति होगी। हर स्कीम का बेंचमार्क भी तय होगा। मार्केट कैप के हिसाब से ही लिस्टिंग होगी। पहली 100 कंपनियां लार्जकैप होंगी। 100 से 250 वाली कंपनियां मिडकैप होंगी। 251 से ऊपर वाली कंपनियां स्मॉलकैप होंगी। स्कीम में किसी तरह के बदलाव पर जानकारी देनी होगी और स्कीम में दी गई सूचनाओं को अपग्रेड करना होगा।


सेबी का ये फैसला ऐसे समय आया है जबकि म्युचुअल फंड में लोगों का रुझान बढ़ता जा रहा है। सितंबर में लगातार दूसरे महीने इक्विटी म्युचुअल फंड में निवेश 20 हजार करोड़ से ज्यादा रहा है। जबकि इस साल अभी तक निवेश बढ़कर 1 लाख करोड़ के ऊपर पहुंच गया है।


सेबी के इस फैसले पर कोटक म्युचुअल फंड के एमडी और सीईओ नीलेश शाह का कहना है कि निवेशकों के लिए सेबी का कदम अच्छा है। नए नियमों से निवेशकों को आसानी होगी। निवेशक को स्कीम में निवेश की जानकारी रहेगी। एक कैटेगरी में एक ही स्कीम की इजाजत होगी। लिमिटेशन की वजह से परफॉर्मेंस खराब होती है। निवेशक को फाइनेंशियल एडवाइजर की जरूरत होती है। पोर्टफोलियो को तैयार करने में फाइनेंशियल एडवाइजर मदद जरूरी है। प्रोफेशनल फंड मैनेजर सही ढंग से स्थिति संभालेंगे। घरेलू निवेशकों से भारतीय बाजार की स्थिति अच्छी है।