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आवाज अड्डाः राष्ट्रपति चुनाव का बजा बिगुल, किसे मिलेगी दावेदारी!

प्रकाशित Tue, 13, 2017 पर 21:02  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

राष्ट्रपति चुनाव की हलचल तेज हो गई है। चुनाव की तारीखों का एलान हो चुका है। लेकिन अभी तक किसी उम्मीदवार का नाम सामने नहीं आया है। ना सत्ता पक्ष से, ना विपक्ष से। बीजेपी ने अपने तीन वरिष्ठ मंत्रियों की समिति जरूर बना दी है, जो राष्ट्रपति के उम्मीदवार का फैसला करेगी। सरकार कह रही है कि वो सभी पक्षों से सहमति बनाने की कोशिश करेगी। और इसके लिए वो विपक्षी दलों से भी चर्चा करेगी। लेकिन क्या किसी एक नाम पर सहमति बनने की गुंजाइश है। क्या विपक्ष सरकार के उम्मीदवार को स्वीकार कर लेगा या वो इस चुनाव को विपक्षी एकता बनाने के बड़े मौके के तौर पर इस्तेमाल करेगा।


बीजेपी ने राष्ट्रपति चुनाव के लिए तैयारियां शुरु कर दी है। चुनाव के लिए बीजेपी ने अरुण जेटली, राजनाथ सिंह, वेंकैया नायडू 3 वरिष्ठ मंत्रियों की समिति बनाई है। साथ ही इसके लिए एनडीए के सहयोगी दलों से भी चर्चा की जायेगी। वेंकैया नायडू का कहना है कि
विपक्षी दलों से भी चर्चा की जाएगी औऱ राष्ट्रपति के पद पर सहमति की कोशिश की जायेगी।


गौरतलब हो कि सांसद, राज्यों के विधायक राष्ट्रपति का चुनाव करते हैं। राष्ट्रपति चुनाव के लिए सांसद, विधायक मिलकर इलेक्ट्रोरल कॉलेज बनाते हैं। जिसमें सांसदों, विधायकों के वोटों का एक मूल्य होता है। निर्वाचन क्षेत्र की जनसंख्या के आधार पर मूल्य तय होता है। इसमें 1971 की जनगणना के आधार पर वोटों का मूल्य तय होता है।


राष्ट्रपति पद के दावेदारों की लिस्ट में आरएसएस के सरसंघाचक मोहन भागवत, बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी, झारखंड की राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू, महात्मागांधी के पोते गोपालकृष्ण गांधी, सुषमा स्वराज और आईटी कंपनी विप्रो के चेयरमैन अजीम प्रेमजी शामिल है।


दावेदारों के कार्यकाल पर नजर डालें तो 40 साल से आरएसएस में सक्रिय आरएसएस के सरसंघाचक मोहन भागवत हिंदुत्व की विचारधारा के पक्षधर है। वहीं बीजेपी के  वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी पूर्व उप प्रधानमंत्री रह चुके हैं। 2008 में एनडीए की ओर से पीएम उम्मीदवार रहे थे। झारखंड की राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू झारखंड की पहली महिला राज्यपाल है और बीजेपी की वरिष्ठ आदिवासी नेता भी है। जबकि आईटी कंपनी विप्रो के चेयरमैन
अजीम प्रेमजी खुद के नाम पर फाउंडेशन भी चलाते हैं और शिक्षा के क्षेत्र में इनका अहम योगदान है। महात्मा गांधी के पोते गोपालकृष्ण गांधी, पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल है और  कई देशों में राजदूत भी रहे हैं।