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आवाज अड्डाः तीन तलाक के मुद्दे से बीजेपी को सियासी फायदा!

प्रकाशित Mon, 17, 2017 पर 20:56  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

तीन तलाक यानि तलाक ए बिद्दत हट जाना चाहिए या नही। ये मामला इस वक्त सुप्रीम कोर्ट में है और मुस्लिस समुदाय के भीतर बहस छिड़ी है कि किस तरह एक झटके में तन तलाक देने की प्रथा का अंत होना चाहिए। लेकिन एसा लगता है कि तीन तलाक के मुद्दे में राजनीतिक गुंजाइश भी दिखाई दे रही है। रविवार को उडीसा में प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार फिर तीन तलाक का मुद्दा उठाया साथ में ये भी कहां कि मुस्लिस समुदाय के साथ लेकर तीन तलाक का हल ढूंडना चाहिए। आज उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तीन तलाक की बात छेड़ी। योगी ने तो तीन तलाक की तुलना द्रौपदी के चीर हरण के साथ कर दी।


बीजेपी का फोकस इस वक्त मुस्लिम महिलाओं पर है। प्रधानमंत्री मोदी के बाद यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी ट्रिपल तलाक पर वार किया है। योगी ने कहा कि जो लोग तीन तलाक पर चुप्पी साधे हुए हैं वो भी अपराधी हैं. वो यहां नहीं रुके उन्होंने तीन तलाक की तुलना द्रौपदी के चीर हरण से कर दी।


मौका था प्रधानमंत्री चंद्रशेखर पर किताब विमोचन का। यहां पर यूपी सीएम ने तीन तलाक के अलावा समान आचार संहिता का मुद्दा भी छेड़ दिया। योगी के बयानों के विरोध भी शुरू हो गया है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल बोर्ड ने सीएम योगी के बयान की आलोचना की है।


रविवार को प्रधानमंत्री ओडिसा में बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में ट्रिपल तलाक पर बोले। उन्होंने कहा मुस्लिम महिलाओं का शोषण खत्म होना चाहिए और उनके साथ न्याय होना चाहिए। उन्होंने बीजेपी कार्यकर्ताओं को जिले स्तर पर ट्रिपल तलाक का मामला देखने को कहा है। पीएम के बयान के अगले ही दिन उत्तर प्रदेश के नए सीएम योगी ट्रिपल तलाक पर बोलते है। ट्रिपल तलाक पर फैसला सुप्रीम कोर्ट में होना है और इस पर सुनवाई भी जारी है।


मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने तीन तलाक मुद्दे पर नया फरमान जारी किया है। बोर्ड के मुताबिक शरीयत कारणों के बिना तीन तलाक देने वालों का सामाजिक बहिष्कार किया जायेगा। पूरे मामले को शरीयत कानून की नजर से ही देखना चाहिए। इतना ही नहीं बोर्ड का कहना है तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद अपनी राय रखेंगे। बोर्ड के मुताबिक तीन तलाक को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है। बोर्ड व्हॉट्सऐप-कूरियर से भी तलाक को जायज मानती है। तीन तलाक को 5 करोड़ 83 लाख लोग ने सपोर्ट किया है। 
 
बता दें कि ट्रिपल तलाक पर सुप्रीम कोर्ट 5 जजों की संवैधानिक पीठ बन सकती है। चीफ जस्टिस जे एस केहर ने दिए पीठ बनाने के संकेत दिए है। चीफ जस्टिस के मुताबिक इस मामले में कानूनी पहलुओं पर ही सुनवाई होगी। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों से अपने जवाब तैयार करने को कहा है। 30 मार्च को मामले के सभी मुद्दे तय होंगे। ट्रिपल तलाक पर सुप्रीम कोर्ट 11 मई से सुनवाई करेगा। हालांकि कोर्ट ने साफ किया कि युनिफार्म सिविल कोड पर बहस नहीं होगी।


ऐसा नहीं है कि ट्रिपल तलाक का मामला पहली बार सामने आया हो इससे पहले भी उत्तराखंड की सायरा बानो को उसके पति ने शादी के 10 साल बाद मायके में चिट्ठी लिख कर तलाक दे दिया था। चिट्ठी में सिर्फ तीन बार तलाक तलाक तलाक लिखा था। सायरा ने गुजारा भत्ता के बजाए तलाक की वैधता को चुनौती दी। इसके अलावा उसने एक से ज्यादा शादी और हलाला को भी चुनौती दी। इसके लिए सायरा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।


सायरा की तरह ही इंदौर की शाहबानो को 1978 में उनके पति ने तलाक दिया था। हालांकि शाहबानो ने ट्रिपल तलाक को चुनौती ना देते हुए गुजारा भत्ता के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी थी। जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने शाहबानो के पक्ष में फैसला सुनाया था। तब सुप्रीम कोर्ट के फैसले का मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने विरोध किया था। ट्रिपल तलाक पर राजीव गांधी सरकार ने 1986 में मुस्लिम महिला (तलाक पर अधिकार संरक्षण) अधिनियम बनाया गया था। जिसके तहत उस नए कानून में पति गुजारा भत्ता देने की जिम्मेदारी से मुक्त करार किया गया था। तब राजीव सरकार पर मुस्लिम तुष्टिकरण का आरोप लगाया गया था।


तीन तलाक पर केंद्र सरकार ने विरोध करते हुए तीन तलाक को महिलाओं से लैंगिक भेदभाव करार दिया है। सरकार का कहना है कि महिलाओं को संवैधानिक अधिकारों से वंचित नहीं रखा जा सकता और पर्सनल लॉ के आधार पर महिलाओं से उनका हक नहीं छीन सकते है। सरकार के मुताबिक महिलाओं की गरिमा से समझौता नहीं किया जा सकता है।


सवाल है कि बार-बार बीजेपी के आला नेता ट्रिपल तलाक पर मुखर क्यों है। उत्तर प्रदेश चुनाव के बाद एक आंकलन ये भी था कि ट्रिपल तलाक का मुद्द उठाने के कारण मुस्लिम महिलाओं ने बीजेपी को वोट दिया है। तो क्या ट्रिपल तलाक का मुद्दा बार बार उठाने से बीजेपी को राजनीतिक फायदा होगा।