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आवाज़ अड्डा: कोई नहीं पीछे, चुनावी जंग में झूठ-सच सब जायज

प्रकाशित Fri, 08, 2017 पर 09:56  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

कोई किसी को नीच कह रहा है तो कोई मुगलिया और औरंगजेबी सोच का हवाला दे रहा है। गुजरात में पहले चरण की 89 सीटों पर प्रचार का शोर थम चुका है। लेकिन बीजेपी के विकास के दावे और उसको कांग्रेस की चुनौती के साथ जो चुनावी वाद-विवाद शुरू हुआ थो, वो जीएसटी, नोटबंदी, बेरोजगारी, जातिगत गोलबंदी, आरक्षण, राहुल गांधी के धर्म और राममंदिर के मुकदमे से होता हुआ अब सच्चे और झूठे की लड़ाई तक पहुंच चुका है। लेकिन अभी तो सिर्फ एक चक्र पूरा हुआ है। दूसरे चरण का प्रचार अभी बाकी है और पहले चरण के मतदान में भी वक्त है। आवाज़ अड्डा में गुजरात के दंगल की ताजा स्थिति का आकलन और भविष्य की दशा-दिशा, लेकिन उससे पहले एक नजर सच और झूठ की लड़ाई पर।


मणिशंकर अय्यर ने टिप्पणी प्रधानमंत्री मोदी के लिए की है। वजह ये है कि प्रधानमंत्री ने भीमराव अंबेडकर और जवाहरलाल नेहरु के बीच मतभेद की चर्चा कर कांग्रेस को नीचा दिखाया। मणिशंकर को इस बयान से तुरंत पलटना भी पड़ा क्योंकि राहुल गांधी ने पार्टी को इस बयान से अलग कर लिया। इधर प्रधानमंत्री मोदी ने चुनावी रैली में इसे गुजराती अस्मिता से जोड़ दिया।


ये एक बानगी भर है कि गुजरात में बीजेपी और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग कहां पहुंच चुकी है। मोदी ने अपनी चुनावी सभाओं में लोगों को तफ्शील से समझाया था कि जब वो गुजरात के मुख्यमंत्री थे और सरदार सरोवर परियोजना के काम से वो तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पास जाते थे तो वो सिर्फ टालमटोल करते रहते थे। अब खुद मनमोहन सिंह सामने आकर कह रहे हैं कि मोदी जी गलतबयानी कर रहे हैं।


गुजरात चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस के बीच तुम झूठे, नहीं तुम झूठे - की ऐसी जंग कई मौकों पर दिखी। विकास गांडो थयो कैंपेन, जीएसटी, गैर हिंदुओं के रजिस्टर में राहुल गांधी के नाम की एंट्री, राहुल-हार्दिक मुलाकात, हार्दिक की सेक्स सीडी प्रकरण में भी खूब तू-तू मैं-मैं हुई। इसी कड़ी में एक और मुद्दा है कि अयोध्या विवाद में कपिल सिब्बल यूपी सुन्नी वक्फ बोर्ड की वकालत कर रहे हैं या नहीं।


सवाल उठता है कि गुजरात मॉडल से शुरू हुआ वाद-विवाद का स्तर इतना नीचे क्यों गिर गया? क्या व्यक्तिगत वार-पलटवार के शोर में बुनियादी मुद्दे पीछे छूट गए?