Facebook Pixel Code = /home/moneycontrol/commonstore/commonfiles/header_tag_manager.php
Moneycontrol » समाचार » राजनीति

आवाज अड्डाः कर्नाटक में छापों का गुजरात कनेक्शन!

प्रकाशित Thu, 03, 2017 पर 09:31  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

भारत की मौजूदा राजनीति में गुजरात की अहमियत पर सबके अपने नजरिए हो सकते हैं। मगर ये तथ्य है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके सबसे करीबी सहयोगी बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की राजनीति गुजरात से परवान चढ़ी और वो भी कांग्रेस के खिलाफ। फिर कांग्रेस मुक्त भारत के नारे के साथ मोदी-शाह की जोड़ी राष्ट्रीय राजनीति में आई और छा गई।


इधर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल की राजनीतिक जड़ें भी गुजरात में हैं। पटेल 3 बार लोकसभा और 4 बार राज्यसभा के सांसद रह चुके हैं। लेकिन अब पांचवीं बार राज्यसभा पहुंचने की बारी आई है तो गुजरात कांग्रेस चौतरफा घिरी हुई दिखाई देती है। इल्जाम बीजेपी पर है कि उसने पटेल की सीट हथियाने के लिए सारे घोड़े खोल रखे हैं।


राज्यसभा में हंगामा, लोकसभा में सवाल और बंगलुरु में सड़क पर बवाल, कांग्रेस कहती है कि दरअसल मामला गुजरात की एक राज्यसभा सीट का है, जिसपर सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल चुनाव लड़ रहे हैं और बीजेपी उन्हें रोकने के लिए गुजरात के विधायकों पर साम, दाम, दंड, भेद सब आजमा रही है। गुजरात के 6 कांग्रेस विधायक पार्टी छोड़ चुके हैं। उनमें से तीन बीजेपी में शामिल हो चुके हैं और उनमें से एक को अहमद पटेल के खिलाफ बीजेपी ने उम्मीदवार भी बनाया है। कांग्रेस ने बीजेपी से बचाने के लिए अपने विधायकों को बंगलुरू के एक रिसॉर्ट में छिपा रखा है। कांग्रेस कह रही है कि विधायकों को डराने के लिए अब वहां इनकम टैक्स की रेड करवा दी गई।


कांग्रेस ने अपने आरोप और आशंकाएं इलेक्शन कमीशन को बता दी हैं लेकिन सरकार कह रही है कि इनकम टैक्स रेड को गुजरात की परिस्थितियों से जोड़ने की बजाए, आर्थिक अपराध के खिलाफ एक कार्रवाई के तौर पर देखा जाना चाहिए।


सवाल उठता है कि क्या अहमद पटेल को राज्यसभा जाने से रोकने के लिए बीजेपी विधायकों के पीछे हाथ धोकर पड़ गई है? इससे पहले विपक्ष ने बिहार में लालू परिवार के खिलाफ ईडी, आईटी और सीबीआई की कार्रवाई पर राजनीतिक साजिश बताया था, इसी तरह भ्रष्टाचार के मामले में तृणमूल कांग्रेस नेताओं के खिलाफ कार्रवाई, केजरीवाल के प्रिंसिपल सेक्रेटरी के दफ्तर में सीबीआई रेड, 2 साल में अलग-अलग आरोपों में आप के 13 विधायकों की गिरफ्तारी, तमिलनाडु में एआईएडीएमके नेताओं पर छापों, चिदंबरम और उनके बेटे के खिलाफ छापों और हिमाचल के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की संपत्तियां जब्त होने पर भी राजनीतिक वजहों से एजेंसियों के इस्तेमाल का आरोप लगा था।


तो क्या वाकई मोदी सरकार विरोधियों के सफाए के लिए एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है? या फिर विपक्ष राजनीति की आड़ में भ्रष्टाचार का बचाव कर रहा है?