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आवाज अड्डाः 2019 में मोदी को चुनौती देने को तैयार हैं राहुल!

प्रकाशित Wed, 13, 2017 पर 09:14  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

पहली बार राहुल गांधी ने खुद ये कहा है कि वो 2019 में मोदी के खिलाफ कांग्रेस की कमान लेने को तैयार हैं। आप राहुल गांधी को पसंद या नापसंद कर सकते हैं, लेकिन उन्हें इग्नोर नहीं कर सकते। शायद यही वजह है कि अमेरिका के बर्कले में राहुल गांधी की बातचीत पर बीजेपी ने तुरंत सवाल खड़े कर दिए। राहुल ने साफ तौर पर सरकार की आर्थिक नीतियों, कश्मीर नीति और देश के आम माहौल की जो तस्वीर खींची है, स्वाभाविक तौर पर वो सरकार के खिलाफ जाती है लेकिन राहुल ने कांग्रेस की कमियां भी गिनाई हैं। तो क्या अब राहुल गांधी प्रधानमंत्री मोदी को चुनौती देने के लिए तैयार हैं?


भारत से हजारों मील दूर, बहुत दिनों के बाद राहुल गांधी इतना खुलकर बोले। अमेरिका के बर्कले में यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के मंच पर राहुल ने नोटबंदी, जीएसटी, ग्रोथ, कश्मीर और रोजगार जैसे मुद्दों पर मोदी सरकार की नाकामियां गिनाईं तो ये भी बताया कि भारत में 1000 ट्रोल सिर्फ उनकी छवि खराब करने के काम पर लगाए गए हैं जिनकी कमान देश के प्रधानमंत्री के पास है। इतना ही नहीं उन्होंने कांग्रेस और खुद के बारे में भी बेबाक जवाब दिए। राहुल ने पहली बार स्वीकार किया कि वो 2019 में कांग्रेस के चेहरे के तौर पर मोदी के खिलाफ मोर्चा लेने के लिए तैयार हैं, लेकिन फैसला कांग्रेस पार्टी को लेना है।


वंशवाद के सवाल पर राहुल ने कहा कि व्यक्ति के वंश पर नहीं उसकी क्षमता पर बात होनी चाहिए और भारत में सिर्फ राजनीति ही नहीं हर जगह वंशवाद दिखाई देता है। राहुल ने माना कि दस साल की एंटी इंकम्बेंसी के अलावा नेताओं के अहंकार ने भी कांग्रेस को सत्ता से बाहर करने में बड़ी भूमिका निभाई।


प्रधानमंत्री पर राहुल की टिप्पणियों पर बीजेपी ने सख्त ऐतराज जताया है। स्मृति ईरानी ने कहा कि राहुल गांधी की देश में कोई नहीं सुनता, इसलिए अब वो विदेश जाकर अपनी बात सुना रहे हैं। और अगर राहुल नेताओं के अहंकार को कांग्रेस की हार की वजह मानते हैं तो ये उनकी मां सोनिया पर एक टिप्पणी है और इसपर कांग्रेसियों को विचार करना चाहिए।


अमेरिका में राहुल की लंबी-चौड़ी बातचीत पर शायद इतना ध्यान न भी जाता, लेकिन बीजेपी की तरफ से तुरंत आई प्रतिक्रिया ने आग को हवा दे दी। और कांग्रेस पार्टी ने राहुल का बचाव करते हुए कहा कि कांग्रेस की गलती की चर्चा करके राहुल ने लोकतांत्रिक होने का परिचय दिया है।


विदेश में ही सही, सरकार और कांग्रेस के प्रति राहुल गांधी ने एक मुकम्मल नजरिया रखा है और पहली बार माना है कि वो कांग्रेस की कमान लेने को तैयार हैं। तो क्या 2019 में राहुल मोदी के मुकाबले में उतरेंगे?