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आवाज़ अड्डा: खादी के कैलेंडर पर मोदी, विपक्ष ने साधा निशाना!

प्रकाशित Fri, 13, 2017 पर 20:46  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

चर्खा, खादी और बापू इन तीनों को एक दूसरे से अलग करके नही देखा जा सकता। लेकिन अब इस फॉर्मूले में क्या बापू आउट और मोदी इन हो गए है। खादी विलेज इंडस्ट्रीज कॉर्पोरेशन यानी केवीआईसी के इस साल के कैलेंडर और डायरी पर गांधी जी के बजाय मोदी जी चर्खा चलाते दिखे। इसका तुरंत विरोध शुरू हो गया इस आरोप के साथ कि मोदी गांधी जी की जगह लेने की कोशिश कर रहे है। जवाब में बीजेपी ने कहा है कि खादी को बढ़ावा देने के लिए जो प्रधानमंत्री मोदी ने किया है वो कभी पहले हुआ नहीं हुआ।


खादी ग्राम्य उद्योग आयोग यानी केवीआईसी के कैलेंडर को लेकर विवाद हो गया है। इस बार के कैलेंडर और डायरी पर पीएम मोदी की चर्खा चलाते हुए तस्वीर छपी है। पिछली बार कैलेंडर पर महात्मा गांधी की तस्वीर छपी है। संस्था ने कहा है कि ऐसा कोई नियम नहीं है कि सिर्फ गांधी की तस्वीर ही छापी जा सकती है। पहले भी बिना गांधी की तस्वीर के खादी इंडिया का कैलेंडर छपता रहा है। पीएम मोदी इस वक्त खादी के सबसे बड़े ब्रांड अंबेसडर हैं, इसलिए उनकी तस्वीर छापी गई है।


उधर मोदी की तस्वीर छपने पर केवीआईसी के कर्मचारियों ने भी काली पट्टी बांध कर विरोध किया है। कांग्रेस ने गांधी की जगह मोदी की तस्वीर छापने को पाप बताया है।


केवीआीसी कैलेंडर को लेकर छिड़े विवाद पर कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने पीएम मोदी को आड़े हाथ लिया। उन्होने कहा कि मोदी पहले खुद को पटेल समझते थे, अब मोदी खुद को गांधी भी समझते हैं। पीएम ने नेहरू जी के बारे में अपमानजनक बातें बोली, आरएसएस ने विचारधारा के आधार पर गांधी जी की हत्या की। महात्मा गांधी के पोते तुषार गांधी ने इस मामले पर चुटकी लेते हुए कहा कि ये देश की सबसे अक्षम और निष्ठाहीन संस्था की विश्वसनीयता हासिल करने की कोशिश है। पीएम को इस संस्था का चेहरा बनने पर चिंता होनी चाहिए।


खादी ग्रामोद्योग के कैलेंडर में महात्मा गांधी की जगह पीएम मोदी की तस्वीर लगाने पर केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र ने सफाई दी है। कलराज मिश्र ने कहा है कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि केलेंडर में पीएम का फोटो कैसे लगी। गांधी की बराबरी कोई नहीं कर सकता। इधर बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा है कि मोदी की तस्वीर को लेकर बेकार का विवाद पैदा किया जा रहा है। बीजेपी की सफाई है कि कैलेंडर पर गांधी की तस्वीर 7 बार पहले भी नहीं छपी है। पीएम मोदी ने खादी को बढ़ावा दिया है। पीएम ने खादी फॉर नेशन, खादी फॉर फैशन का नारा दिया। यूपीए के दौर में खादी की बिक्री में औसतन 5 फीसदी बढ़ी जबकि मोदी सरकार आने के बाद बिक्री 35 फीसदी बढ़ी है। मोदी सरकार गांधी दर्शन को घर-घर पहुंचा रही है।


राजनीतिक विरासत की इस लड़ाई पर नजर डालें तो नेहरू, इंदिरा की विरासत को दरकिनार करने की कोशिश नजर आती है। मोदी सरकार ने अपनी इस निति के तहत आंबेडकर पर जोरशोर से कार्यक्रम किए। वल्लभ भाई पटेल की याद में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की योजना है। बीजेपी का जेपी की जयंती बड़े पैमाने पर मनाने फैसला है। नेहरू संग्रहालय की काया-पलट करने की योजना है।


अब सवाल ये है कि क्या खादी के कैलेंडर पर मोदी की तस्वीर पर विवाद जायज है, क्या मोदी खादी के सबसे बड़े ब्रांड एम्बैसडर बन गए हैं, क्या मोदीगांधी की विरासत हथियाने की कोशिश कर रहे हैं मोदी? आज के आवाज़-अड्डा में इन्ही सवालों के जवाब खोजने की कोशिश की जा रही है।