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आवाज़ अड्डा: कौन जीतेगा दिल्ली वालों का दिल, किसका पलड़ा भारी

प्रकाशित Fri, 21, 2017 पर 21:02  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

दिल्ली एक शहर है। दिल्ली भारत की राजधानी है। दिल्ली दिल है हिंदुस्तान का। मगर दिल्ली इस वक्त है एक बड़ा मैदान। चुनाव का। चुनाव तो नगरपालिका का है मगर हंगामा पूरे देश में है। वजह ये कि यहां बीजेपी की साख, आम आदमी पार्टी की जमीन दांव पर है। वहीं कांग्रेस पार्टी को ये उम्मीद दिख रही है कि दिल्ली ही शायद वो जगह है जहां से उसका पुनर्जागरण शुरू हो सकता है।


दिल्ली नगर निगम यानि एमसीडी पर पिछले 10 सालों से बीजेपी का कब्जा है। लोग एमसीडी के कामकाज से नाराज भी हैं। लेकिन सत्ता विरोधी लहर के बावजूद अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के लिए एमसीडी की जंग जीतना आसान नहीं होगा। केजरीवाल की दो साल पुरानी सरकार भी विवादों में घिरी है और बीजेपी आम आदमी पार्टी को कठघरे में खड़ा करने में कामयाब हुई है। इसका एक और मौका बीजेपी को शुक्रवार को मिला जब अर्विंद केजरीवाल ने दिल्ली के लोगों को चेतावनी दे दी कि अगर वो बीजेपी को वोट देंगे तो डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों के लिए वो खुद जिम्मेदार होगे। बीजेपी ने इसपर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उधर कांग्रेस अपनी जीत की ताल ठोक रही है।


एमसीडी पर कब्जे के लिए आम आदमी पार्टी, बीजेपी और कांग्रेस में त्रिकोणीय मुकाबला है। एमसीडी, दुनिया की सबसे बड़ी म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन में से एक है। एमसीडी 3 हिस्सों में बंटी है। एमसीडी पर बीजेपी का पिछले 10 साल से कब्जा है। पहली बार एमसीडी चुनाव में मतदाता नोटा का इस्तेमाल करेंगे। एमसीडी चुनाव में आम आदमी पार्टी पहली बार चुनाव मैदान में है, जबकि योगेंद्र यादव की पार्टी स्वराज इंडिया भी मैदान में है। 23 अप्रैल को एमसीडी का चुनाव है और 26 अप्रैल को नतीजे आएंगे।


दरअसल दिल्ली में डेंगू और चिकनगुनिया का खौफ है। इस साल 3 महीने में ही डेंगू के 24 और चिकनगुनिया के 79 मामले सामने आए हैं। 2016 में डेंगू के 4431 मामले रिपोर्ट किए गए, जबकि चिकनगुनिया के 9749 मामले सामने आए।


एमसीडी चुनावों के लिए आम आदमी पार्टी ने अपने घोषणापत्र की टैगलाइन - अब हम करेंगे स्वच्छ दिल्ली दी है। आप ने दिल्ली में सफाई कर्मचारियों की संख्या बढ़ाए जाने का वादा किया है। सफाई कर्मचारियों का स्वास्थ्य बीमा कराने का वादा किया है। सफाई कर्मियों को महीने की 7 तारीख को वेतन देने का वादा किया गया है। 3 साल में डेंगू और चिकनगुनिया से मुक्त दिल्ली का वादा किया गया है।


आम आदमी पार्टी ने हाउस टैक्स माफ करने का वादा किया है और निगम को भ्रष्टाचार मुक्त करने पर जोर देने की बात कही है। व्यापारियों को कन्वर्जन फीस से मुक्ति दिलाने का वादा किया गया है। पार्किंग ठेके माफिया से मुक्त किए जाने का वादा किया गया है। एमसीडी को घाटे से निकालकर फायदे में लाने का वादा किया गया है। शिक्षकों की नियुक्ति करने का वादा किया गया है।


बीजेपी ने दिल्ली वालों से कामकाज में पारदर्शिता लाने का वादा किया है। दिल्ली में साफ सफाई पर खास जोर देने का वादा किया है। गरीबों को सिर्फ 10 रुपये में खाना देने का वादा किया है। रेहड़ी पटरी वालों का पक्का रजिस्ट्रेशन करने और सफाई कर्मचारियों को फ्री जीवन बीमा के साथ कैशलेस स्वास्थ्य बीमा देने का वादा किया है। बीजेपी ने अस्थायी सफाई कर्मचारियों को नियमित करने का वादा किया है। हर स्कूल में वाटर प्यूरिफायर और सीसीटीवी लगाने का वादा किया है। 500 वर्गमीटर के प्लॉट का नक्शा पास कराने की अनिवार्यता खत्म करने का वादा किया है। लघु उद्योगों को लाइसेंस से मुक्त करने का वादा किया है।


कांग्रेस ने दिल्ली को साफ रखने का वादा किया है और सफाई कर्मचारियों को वक्त पर वेतन देने पर जोर दिया है। एमसीडी स्कूलों में बदलाव और 6500 शिक्षकों की नियुक्ति करने का वादा किया है। प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों का आधुनिकीकरण और रेहड़ी पटरी वालों का पक्का रजिस्ट्रेशन का वादा किया है। 10 साल के बाद कन्वर्जन चार्ज नहीं लिए जाने का वादा किया है। हर 1 किलोमीटर पर शौचालय और सभी सड़कों पर 750 मीटर पर 1 कूड़ेदान का प्रबंध करने का वादा किया है।


गौरतलब है कि अगर एमसीडी चुनाव में आम आदमी पार्टी की जीत होती है तो गुजरात चुनाव से पहले पार्टी में जोश भरेगा। लेकिन, पार्टी को हार नसीब हुई तो फिर केजरीवाल की साख पर बट्टा लगेगा। इसके साथ ही राष्ट्रीय नेता बनने का अरविंद केजरीवाल का दावा कमजोर होगा। यही नहीं आम आदमी पार्टी की हार को दिल्ली सरकार के कामकाज पर रेफरेंडम बताया जाएगा।


वहीं कांग्रेस की जीत होती है तो इसे अच्छे प्रदर्शन को वापसी के तौर पर देखा जाएगा। लेकिन, हार हुई तो फिर अजय माकन के नेतृत्व पर सवाल उठेंगे। साथ ही हार के बाद दिल्ली में कांग्रेस की हालत और खस्ता होगी। वहीं एमसीडी चुनाव में बीजेपी की जीत को मोदी लहर के तौर पर देखा जाएगा और दिल्ली विधानसभा चुनाव में 2015 की हार की निराशा हटेगी। साथ ही मनोज तिवारी की लीडरशिप मजबूत होगी।


अभी हाल ही में एबीपी न्यूज-सी वोटर सर्वे की ओर से कराए गए सर्वे में एमसीडी की 272 सीटों में से बीजेपी को 179 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है। सर्वे के मुताबिक आम आदमी पार्टी के खाते में 45 सीटें और कांग्रेस के खाते में 26 सीटें जा सकती हैं। वहीं 2012 के एमसीडी चुनावों में बीजेपी को 164 सीटें मिली थी, जबकि कांग्रेस को 67 सीटें और बीएसपी को 17 सीटें हासिल हुई थी।