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आवाज अड्डाः दिल्ली के प्रदूषण पर राजनीति, क्या होगा एक्शन प्लान!

प्रकाशित Wed, 15, 2017 पर 20:40  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

दिल्ली में हवा की क्वालिटी थोड़ी सुधरी है, लेकिन अभी भी प्रदूषण खतरनाक स्तर पर है। मगर अब दिल्ली की हवा की तरह, प्रदूषण पर राजनीति भी दमघोंटू होती जा रही है। स्मॉग की समस्या सिर्फ दिल्ली ही नहीं, पूरे उत्तर भारत को चपेट में लेती जा रही है। लेकिन राज्यों और केंद्र के साझा प्रयास के नाम पर खास कुछ होता हुआ नहीं दिखता। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की मुलाकात से कोई ठोस बात अभी नहीं निकली है। और पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने तो केजरीवाल से मिलने से भी मना कर दिया है।    


दिल्ली के स्मॉग की समस्या का ठीकरा कभी पराली जलाने पर फोड़ा जा रहा है तो कभी कंस्ट्रक्शन और गाड़ियों पर। एनजीटी कड़ाई से ऑड-ईवन लागू करवाना चाहता है तो दिल्ली सरकार कह रही है कि महिलाओं और दोपहिया वाहनों को छूट दिए बिना इसे लागू नहीं किया जा सकता। दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर ने पार्किंग चार्ज बढ़ा दिए हैं तो दिल्ली सरकार कह रही है कि इससे कोई फायदा नहीं हुआ, इसलिए ये बढ़ोतरी वापस ले लेनी चाहिए।


आरआईटी से मिली जानकारी के मुताबिक दिल्ली सरकार बतौर पर्यावरण सेस वसूले गए 787 करोड़ रुपये में से सिर्फ 93 लाख खर्च कर पाई है। इधर पराली जलाने के मुद्दे पर पंजाब सरकार कुछ सुनने को तैयार नहीं है। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने केजरीवाल से मुलाकात करने तक से मना कर दिया है। हरियाणा के मुख्यमंत्री खट्टर और केजरीवाल की मुलाकात जरूर हुई लेकिन प्रदूषण कम करने को लेकर कोई ठोस बात सामने नहीं आई।


साल दर साल दिल्ली और उत्तर भारत के अलग-अलग हिस्सों में स्मॉग की समस्या विकराल होती जा रही है। लेकिन अभी तक केंद्र या राज्य सरकारों की तरफ से, समस्या को समझने और उससे मुकाबला करने को लेकर कोई मुकम्मल प्रयास दिखाई नहीं दिए।


ऐसे में सवाल उठता है कि क्या राजनीतिक वजहों से प्रदूषण की बड़ी समस्या की अनदेखी हो रही है? जब तक दिल्ली में जहरीली हवा का डेरा रहेगा, तभी तक प्रदूषण पर चर्चा होगी, फिर अगले साल तक ठंडे बस्ते में चली जाएगी? सवाल ये भी है कि अगर केजरीवाल सरकार पर्यावरण सेस से मिला हुआ पैसा भी खर्च नहीं कर पा रही है तो वो स्मॉग की समस्या के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार नहीं है?