Moneycontrol » समाचार » राजनीति

आवाज़ अड्डा: लाउडस्पीकरों पर हल्ला बोल, नियम लागू कर पाएगी सरकार!

प्रकाशित Mon, 08, 2018 पर 20:56  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

यूपी सरकार ने शोर मचाने वाले लाउडस्पीकरों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 15 जनवरी के बाद, यूपी में कहीं भी, बिना इजाजत लाउडस्पीकर बजाने पर रोक होगी - मंदिरों, मस्जिदों, गुरुद्वारों में भी। सरकार ये सख्ती इसलिए कर रही है, क्योंकि 1 फरवरी को उसे इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच को ये जवाब देना है कि ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए उसने क्या उपाय किए हैं। कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार से ये सवाल पूछा था।


कोर्ट के दबाव में ही सही, सरकार के इस फैसले से ध्वनि प्रदूषण पर कितना नियंत्रण होगा ये तो पता नहीं, लेकिन एक नया विवाद जरूर शुरु हो गया है। कुछ लोगों को लगता है कि इस नियंत्रण की आड़ में सरकार को भेदभाव का हथकंडा मिल जाएगा, तो कुछ लोगों को लगता है कि ध्वनि प्रदूषण के नाम पर धार्मिक मामले में दखलंदाजी की जा रही है। 


यूपी में 15 जनवरी के बाद बिना इजाजत ना तो मस्जिदों में लाउडस्पीकर बजेगा, ना मंदिरों में। वैसे ये नियम सिर्फ मंदिरों, मस्जिदों या गुरुद्वारों के लिए नहीं, बल्कि सभी तरह के लाउडस्पीकरों पर लागू होगा। इजाजत देने की शर्त ये होगी कि कोई भी लाउडस्पीकर अपने आस-पास की आवाज से बहुत ज्यादा शोर ना मचाए। सार्वजनिक जगहों पर आसपास के साउंड लेवल से 10 डेसीबल और निजी जगहों पर 5 डेसीबल तक ऊपर हो सकता है, उससे ज्यादा नहीं।


सरकार ये कदम कोर्ट की दखल के बाद उठा रही है, फिर भी एक तबके को लगता है कि इसमें भेदभाव की गुंजाइश है, वहीं एक तबका इस पूरी कवायद को ही धार्मिक मामलों में दखल और गैरजरूरी मानता है।


वहीं बीजेपी और आरएसएस का कहना है कि सरकार कोर्ट की दखल पर ये कदम उठा रही है, इसलिए इसे धर्म के चश्मे से देखना सही नहीं है।


वैसे ध्वनि प्रदूषण को लेकर नियम तो काफी पहले से मौजूद हैं, लेकिन सिर्फ फाइलों में। जबकि धार्मिक स्थलों से पैदा होने वाले शोर पर सवाल उठते रहे हैं। अब कोर्ट के दबाव में सरकार एक्शन लेने को मजबूर हुई है, वो भी सिर्फ यूपी में। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ये चुस्ती हमेशा कायम रहेगी या सिर्फ कोर्ट में जवाब दायर होने तक चलेगी? किसी भी धर्म का लाउडस्पीकर से सीधा संबंध नहीं है। ऐसे में क्या धार्मक स्थलों पर लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को पूरी तरह बैन नहीं कर देना चाहिए?