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आवाज अड्डाः पद्मावती पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, खत्म होगा विवाद!

प्रकाशित Tue, 28, 2017 पर 20:34  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

समझ में नहीं आ रहा है कि कहा क्या जाए। कब तक ये बात चलेगी? कितनी बहस होगी? कोई समझदारी की बात होगी भी या नहीं होगी। जिसकी जो मर्जी आ रही है बक रहा है। जिम्मेदार कुर्सियो पर बैठे लोग भी यूं बयान दे रहे हैं जैसे उन्हें याद ही नहीं कि उन्होंने संविधान की कसम खाई है। जो आग लगाने निकले हैं उनकी तो बात ही क्या। कोफ्त होने लगी है यह चर्चा करके। लेकिन मजबूरी है। हमारे देश में, हमारी दुनिया में जो चल रहा है उससे आंख बंद भी नहीं की जा सकती और हालात जहां पहुंच गए हैं वहां आंख कान बंद करके आप बच भी तो नहीं सकते। कौन जानता है कि कब आप पर ही सवाल खड़ा कर दिया जाए और आपके सर की कीमत लग जाए। कैसे चलेगा ये सब। यही है कानून का राज। सुप्रीम कोर्ट ने पद्मावती विवाद पर साफ कर दिया है कि समाज कानून के हिसाब से ही चलेगा, लोगों के बेतुके ख्यालात से नहीं।


जिस वक्त सुप्रीम कोर्ट बिना फिल्म देखे पद्मावती का विरोध करने वालों को फटकार लगा रहा था, फिल्म पर बैन लगाने वाली याचिका को बेकार बता रहा था, लगभग उसी वक्त बिहार सरकार फिल्म पद्मावती पर बैन लगाने का फैसला कर रही थी।


ऐसे में सवाल उठता है कि क्या नेताओं पर सुप्रीम कोर्ट की फटकार का असर होगा? क्या केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह पद्मावती के खिलाफ बोलना बंद कर देंगे। और सिर्फ गिरिराज सिंह ही क्यों - मध्य प्रदेश और गुजरात के मुख्यमंत्रियों ने खुद घोषणा की है कि पद्मावती को उनके राज्य में रिलीज नहीं होने दिया जाएगा।


राजस्थान सरकार ने फिल्म से तथाकथित विवादित दृश्य हटाने की मांग की है। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी कहा कि पद्मावती का विरोध करने वालों को भी अभिव्यक्ति की आजादी है। हरियाणा की खट्टर सरकार ने कहा है कि सेंसर से पास होने के बाद सोचेंगे कि पद्मावती को बैन किया जाए या नहीं। और अब खट्टर के मंत्री अनिल विज कह रहे हैं कि क्या अब बोलने से पहले सुप्रीम कोर्ट की इजाजत लेनी होगी।


अनिल विज की बातों में कोर्ट की भावना और राजनीतिक जरूरतों के बीच टकराव साफ दिखाई देता है। ऐसे में ये मान लेना कितना सही होगा कि कोर्ट के फैसले के बाद पद्मावती विवाद खत्म हो जाएगा? अगर नहीं, तो आखिर इस फिल्म का होगा क्या?