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आवाज अड्डाः कुछ समय का इंतजार, क्या मजबूत बनी रहेगी मोदी लहर?

प्रकाशित Fri, 10, 2017 पर 20:48  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

एक्जिट पोल आ चुके है और अब चुनाव नतीजों का इंतजार है लेकिन इसके पहले ही उत्तर प्रदेश में महागठबंधन की चर्चाएं शुरू हो गयी हैं। पहला संकेत खुद अखिलेश यादव ने दिया जब बीबीसी हिंदी को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहां कि अगर चुनाव में हार हुई तो बीजेपी को रिमोट कंट्रोल से यूपी की कमान नहीं दी जाएगी। फिलहाल ये सब सिर्फ चर्चाएं है। लेकिन इसके पहले भी एक ट्रेंड नजर आया है जहां बीजेपी को सत्ता से बाहर रखने के लिए अलग-अलग पार्टियां साथ आयी है। फिर चाहे वो दिल्ली का 2013 का चुनाव रहा जहां आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस की मदद से सरकार बनाई या फिर 2015 में बिहार का चुनाव जहां आरजेडी और जेडीयू, कांग्रेस का साथ लेकर बीजेपी को बाहर रखने में कामयाब रहें।


हालांकि चुनाव नतीजों से पहले यूपी में नए गठबंधन की सुगबुगाहट शुरु हो गई है। बीबीसी को दिए इंटरव्यू में अखिलेश ने मायावती के साथ गठबंधन बनाने के संकेत दिए हैं। इतना ही नहीं अखिलेश यादव का कहना है कि वह राष्ट्रपति शासन से बचने के लिए कुछ भी करेंगे। लेकिन बीजेपी को रिमोट कंट्रोल नहीं लेने देंगे।


उत्तर प्रदेश में गठबंधन की सियासत पर नजर डाले तो यूपी में सन 1993 में हुए विधानसभा चुनाव को जीतने के लिए समाजवादी पार्टी ने बीएसपी के साथ गठबंधन किया था। जिसमें सपा-बीएसपी गठबंधन ने 175 सीटें जीती थी और इस गठबंधन का समर्थन कांग्रेस, जनता दल ने दिया था। मुलायम सिंह मुख्यमंत्री बनें थे। वहीं 1995 के विधान सभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और बीएसपी के रिश्ते तल्ख हुए और बीएसपी ने समाजवादी पार्ट से समर्थन वापस ले लिया। जिसकी वजह थी 1995 में ही गेस्टहाउस कांड। जिसके बाद समाजवादी पार्टी और बीएसपी में खटास आई थी।


सन 1996 के चुनाव में बीएसपी और कांग्रेस साथ मिलकर चुनाव लड़े थें। जिसमें बीएसपी को 67 सीट और कांग्रेस को 33 सीट मिली थी। हालांकि इस साल के चुनाव में 176 सीटें जीतने के बावजूद बीजेपी की सरकार नहीं बनी थी। आलाम यह रहा कि चुनाव के 7 महीने बाद बीजेपी- बीएसपी साथ आए और 6-6 महीने के करार के तहत मायावती सीएम बनाई गई। अंत में 6 महीने बाद  बीजेपी- बीएसपी का गठबंधन टूट गया।


सन 2000 के चुनाव की बात करें समाजवादी पार्टी ने 143 सीटों पर जीत हासिल कर उत्तर प्रदेश में सबसे बड़ी पार्टी बनाई। हालांकि 2 महीने के राष्ट्रपति शासन के बाद बीजेपी- बीएसपी साथ आए और मायावती एक बार फिर यूपी की सीएम के रुप में उत्तर प्रदेश के सामने आई। दोनों पार्टियों का गठबंधन एक साल ही चला ही था लेकिन तब तक ताज कॉरिडोर मामले में मायावती ने इस्तीफा देना पड़ा। बीएसपी में टूट हुई और एक धड़े ने सपा समर्थन किया। इसकी वजह रही कि 2003 में एक बार फिर मुलायम यादव उत्तर प्रदेश के सीएम के रुप में जनता के समक्ष पेश हुए।


2013 में भी बीजेपी को दूर रखने के लिए एक बार दिल्ली में आप-कांग्रेस साथ आए। वहीं 2015 में बिहार में जेडीयू- आरजेडी- कांग्रेस का महागठबंधन हुआ और 2016 उत्तराखंड में बीएसपी ने कांग्रेस का साथ दिया।


सवाल यह है कि क्या 2019 के पहले ऐसे कई और गठबंधन नजर आएंगे। अगर एक्जिट पोल सही निकले तो साफ हो जाएगा कि बीजेपी तेजी से देश भर में बढ़त पा रही है। तब क्या गैर बीजेपी पार्टियों के पास एक साथ आने के अलावा कोई विकल्प बचेगा और ऐसे में इस गैर बीजेपी गठबंधन की शक्लो सूरत कैसे होगी। इनका सबसे बड़ा नेता कौन होगा?