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आवाज़ अड्डा: बिहार में सत्ता सस्पेंस, मौके की ताक में बीजेपी!

प्रकाशित Fri, 14, 2017 पर 20:52  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

सवाल भ्रष्टाचार का है और जवाब देना है ब्रांड सुशासन वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को और जवाब भी देना है सीधा-सीधा कि तेजस्वी यादव को बर्खास्त कर रहे हैं या नहीं। रही बात-बीच के रास्ते की तो राजनीति संभावनाओं का खेल है। मगर बिहार जैसे राज्य में संभावनाओं की कोई सीमा नहीं है, चाहे तेजस्वी का इस्तीफा हो या उन्हें बर्खास्त किया जाना। भविष्य को लेकर, महागठबंधन में पावर बैलेंस को लेकर और 2015 के विधानसभा चुनाव में चोट खाए बैठी बीजेपी की रणनीति को लेकर तमाम संभावनाएं आज मुंह बाए खड़ी हैं। आज अड्डा में इन्हीं संभावनाओं की दशा-दिशा समझने की कोशिश करेंगे। लेकिन उससे पहले देखते हैं कि कहां फंसी हुई है बिहार की राजनीति।


बिहार की घटनाओं में देश की दिलचस्पी बनी हुई है क्योंकि दोनों मुख्य खिलाड़ियों के दांव फंसे हुए हैं और बीजेपी सही मौके का इंतजार कर रही है। एफआईआर दर्ज होने के एक सप्ताह बाद भी तेजस्वी यादव इस्तीफा नहीं दे रहे हैं। भ्रष्टाचार के मामलों में अपने मंत्रियों और विधायकों से तुरंत इस्तीफा मांग लेने वाले नीतीश कुमार की हिचक समझ में भी आती है। तेजस्वी से मंत्रीपद छीनते ही बिहार की सत्ता उनके हाथ से फिसल सकती है। उसके बाद फिर बीजेपी पर निर्भर हो जाने की मजबूरी खड़ी हो जाएगी। नीतीश फैसला नहीं ले पा रहे हैं और जेडीयू के नेता आक्रामक तेवर दिखाकर लगातार आरजेडी को बैकफुट पर रख रहे हैं।


आरजेडी को गठबंधन की तीसरी पार्टनर कांग्रेस से भरोसा मिल रहा है और पार्टी पूरी बहस सीबीआई के दुरुपयोग और बीजेपी की राजनीतिक साजिश की तरफ मोड़ने में लगी है। सवाल उठता है कि क्या अब नीतीश कुमार को खुलकर अपना पक्ष साफ नहीं कर देना चाहिए? लालू-नीतीश के गठबंधन के साथ-साथ अब तो ये सवाल भी उठने लगा है कि बिहार में नीतीश की सरकार रहेगी या जाएगी? और क्या छापे और एफआईआर का इस्तेमाल नीतीश यादव परिवार के राजनीतिक कद को नापने के लिए कर रहे हैं, और कोई निर्णायक फैसला आखिर तक नहीं होगा!