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रियल एस्टेट गाइड: अफोर्डेबल हाउसिंग, क्या करना है अभी बाकी!

प्रकाशित Sat, 06, 2018 पर 18:12  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

2018 की शुरुआत हो गई है, हमने रियल एस्टेट पर अब तक बहुत सारी बातें कर ली हैं। लेकिन ऐसे कुछ और पहलू हैं जिन पर बात करना जरूरी है। बजट भी आने वाला है, इस लिहाज से आज रियल एस्टेट गाइड का फोकस होगा अफोर्डेबल हाउसिंग पर क्योंकि सरकार का भी सबसे बड़ा फोकस यही है क्योंकि 2022 तक सबको घर देनें हैं। अब सवाल ये है कि क्या अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए वो सारे काम हो चुके हैं जो होने चाहिए थे, कितना लंबा और है अभी यो सफर और कितना आकर्षक है ये सेगमेंट? इन्हीं मुद्दों पर बात करने के लिए यहां सीएनबीसी-आवाज़ के साथ हैं लाइसिस फोरास के मैनेजिंग डायरेक्टर पंकज कपूर और जाने-माने डेवलपर अरिहंत सुपरस्ट्रक्चर के अशोक छाजेड़।


जानकारों का कहना है अगर नेशनल हाउसिंग बैंक के आंकड़ों को देखें तो शहरी भारत में 1.8 करोड़ घरों की कमी है। दूसरी तरफ शहरी भारत में हर साल करीब 3 या 3.5 लाख यूनिट की ही खपत होती है और सप्लाई 11 लाख की है। ये भारती रियल एस्टेट मार्केट का बहुत बड़ा विरोधाभास है। भारत में पिछले 1 दशक में अफोर्डेबल सेगमेंट में बहुत कम काम हुआ है जबकि 95 फीसदी मांग अफोर्डेबल सेगमेंट से ही है। जमीन की कीमतें लगतार बढ़ रही हैं, साथ ही अलग-अलग मजूरियों में बहुत समय लगता है।


अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए सस्ती जमीन की जरूत है इसके लिए सरकार को शहरों बाहरी हिस्सों में इंफ्रास्ट्रक्चर दुरुस्त करने के साथ रोजगार के साधन उपलब्ध करवाने पर जोर देना होगा।