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इंडिया रियल एस्टेटः रेगुलेटर से बदलेगा वक्त

प्रकाशित Tue, 15, 2016 पर 11:12  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

अब बिल्डरों की मनमानी नहीं चलेगी। संसद ने बिल्डरों पर लगाम कसने के लिए रियल एस्टेट बिल पास कर दिया है। बिल्डरों पर नजर रखने के लिए एक अथॉरिटी होगी। बिल्डर एक प्रोजेक्ट का पैसा किसी दूसरे प्रोजेक्ट में इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। कानून में सबसे बड़ी बात ये है कि जब तक अथॉरिटी से किसी प्रोजेक्ट को मंजूरी नहीं मिल जाती, बिल्डर विज्ञापन नहीं दे पाएंगे। पजेशन में देर हुई तो बिल्डरों को उतना ही ब्याज देना होगा जितना वो लेट पेमेंट पर ग्राहकों से वसूलता है। अब बिना रजिस्ट्री कोई प्रोजेक्ट लॉन्च नहीं होगा और भ्रामक विज्ञापन देने पर बिल्डर को सजा मिल सकती है।


रियल एस्टेट रेगुलेटर बिल बिल्डर और प्रॉपर्टी एजेंट पर लागू होगा। साथ ही रेजिडेंशियल और कमर्शियल प्रोजेक्ट पर भी लागू होगा। रियल एस्टेट रेगुलेटर की शर्तें 500 वर्गमीटर जमीन या 8 फ्लैट वाले अपोर्टमेंट पर लागू होंगी। बता दें कि देश में 76000 से ज्यादा रजिस्टर्ड बिल्डर हैं और हर साल 10 लाख लोग मकान खरीदते हैं। हर साल प्रॉपर्टी में 3.5 लाख करोड़ रुपये का निवेश होता है और हर साल प्रॉपर्टी से जुड़ी 20000 शिकायतें आती हैं।


रियल एस्टेट रेगुलेटर बिल के तहत बिल्डर को प्रोजेक्ट का 70 फीसदी पैसा अलग अकाउंट में रखना होगा। जमीन की कीमत भी 70 फीसदी हिस्से में शामिल होगी। प्रोजेक्ट जमीन का बीमा कराना भी जरूरी होगा। बिल्डर एक प्रोजेक्ट का पैसा दूसरे में इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। बिना जरूरी अप्रूवल के प्रोजेक्ट लॉन्च नहीं हो सकेंगे। बिल्डर भ्रामक विज्ञापन नहीं दे सकेंगे और घर की बिक्री कार्पेट एरिया के आधार पर होगी। रियल एस्टेट बिल पास होने पर इंडस्ट्री के दिग्गजों का कहना है कि इससे खरीदारों को बड़ी राहत मिलेगी।


राज्यसभा में पास होने के बाद रियल एस्टेट रेगुलेटर बिल राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून में तब्दील हो जाएगा। इसके बाद राज्य स्तर पर रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी बनेगी और हर राज्य में रेगुलेटर नियुक्त होंगे। रेगुलेटर की निगरानी में प्रोजेक्ट रहेंगे। रियल एस्टेट रेगुलेटर बिल के अमल में आने से अब 500 वर्गमीटर या 8 फ्लैट के प्रोजेक्ट पर भी मंजूरी लेनी होगी। अभी जिन प्रोजेक्ट्स का सीसी नहीं वो भी नए नियम में शामिल होंगे।


रियल एस्टेट रेगुलेटर बिल के तहत बिल्डर को ग्राहकों का पैसा 15 दिन में अलग एस्क्रो खाते में जमा करना होगा। ग्राहको के 70 फीसदी पैसों का इस्तेमाल सिर्फ प्रोजेक्ट बनाने में होगा और 70 फीसदी पैसों में जमीन की कीमत भी शामिल होगी। ले-आउट में बदलाव पर 66 फीसदी खरीदारों की सहमति जरूरी होगी। वहीं नियम ना मानने पर 3 साल तक जेल और जुर्माने का प्रावधान है। पजेशन से 3 महीने के अंदर रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन बनाना होगा।


रियल एस्टेट रेगुलेटर बिल से ग्राहक और बिल्डर में पारदर्शिता बढ़ेगी। बिल्डरों की मनमानी पर रोक लगेगी और ग्राहक सीधे रेगुलेटर से शिकायत कर सकेंगे। रियल एस्टेट रेगुलेटर बिल के आने से आसानी से प्रॉपर्टी से जुड़े विवाद आसानी से सुलझेंगे। साथ ही घर खरीदारों के अधिकार सुरक्षित होंगे।


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