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रियल एस्टेट गाइड: बजट से बिल्डरों की क्या हैं उम्मीदें

प्रकाशित Mon, 22, 2018 पर 14:24  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

रियल एस्टेट सेक्टर का हाल अच्छा नहीं है। बिल्डर घरों के दाम नहीं घटा रहे। जहां दाम घटे भी हैं वहां लोग घर नहीं खरीद पा रहे। बड़ी संख्या में रोजगार देने वाले इस सेक्टर का रिवाइवल बहुत जरूरी है। तो क्या है रियल एस्टेट सेक्टर का हाल और वित्त मंत्री से क्या चाहते हैं बिल्डर और घर खरीदार।


नोटबंदी, जीएसटी और रेरा की मार झेल रहे रियल एस्टेट की हालत अच्छी नहीं है। रियल एस्टेट पर हाल ही में आई नाइट फ्रैंक की रिपोर्ट के मुताबिक बड़े शहरों में नए प्रोजेक्ट लॉन्च में भारी गिरावट आई है और 2017 में घरों की बिक्री 7 साल के निचले स्तर पर पहुंच गई है। वजह साफ है, बिल्डर घरों की कीमतें नहीं घटा रहे और लोगों की जेब में ज्यादा पैसा नहीं है। ऐसे में रियल एस्टेट सेक्टर के रिवाइवल के लिए कारोबारियों को बजट से काफी उम्मीदें हैं।


बिल्डरों का कहना है कि ज्यादा जीएसटी की वजह से प्रोजेक्ट्स पर असर पड़ा है और काम धीरे चल रहा है। बिल्डरों की मांग है कि अफॉर्डेबल हाउसिंग की तरह और पूरे रेजिडेंशियल सेग्मेंट को इंडस्ट्री का दर्जा मिलना चाहिए। इसके अलावा प्रोजेक्ट के लिए सिंगल विंडो क्लियरेंस बहुत जरूरी है। साथ ही रीट्स के टैक्स नियमों को और आसान करने की जरूरत है। ग्रीन बिल्डिंग बनाने के लिये ज्यादा इंसेंटिव्स चाहिए और जमीन अधिग्रहण के लिए आसान प्रक्रिया होनी चाहिए।


घर खरीदार भी वित्त मंत्री से रियायत चाहते हैं। रेरा की वजह से ब्रोकर्स भी दिक्कत में हैं। प्रोजेक्ट में देरी होने पर घर खरीदार इनका ही गला पकड़ने आते हैं। जानकारों का मानना है कि अगर प्रधानमंत्री आवास योजना को सफल बनाना है तो घर खरीदारों के साथ बिल्डर्स को भी इंसेंटिव्स देने चाहिए। बिल्डरों की मांग है कि रियल एस्टेस सेक्टर के सस्ते कर्ज मिलने चाहिए और रियल एस्टेट को पूरी तरह से जीएसटी की हद में होना चाहिए।