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जीएसटी: कितना बिगड़ा जेब का बजट!

प्रकाशित Sat, 01, 2017 पर 14:45  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

देश के इतिहास का सबसे बडा टैक्स रिफॉर्म। जीएसटी! आपके हमारे, सभी के जीवन में हो रहे इस बडे बदलाव के लिए योर मनी आज आपको तैयार करेगा। हम आपको ना सिर्फ ये बताएंगें, क्या सस्ता हुआ और क्या महंगा, बल्कि हमारा फोकस है आपकी पूरी आर्थिक जिंदगी पर। कैसे मैनेज करें घर के बजट को और कैसे करें अपनी फाइनेंशियल प्लनिंग, कैसे मंहगाई का हो कम से कम असर पड़े आपकी जेब पर। जीएसटी के बाद आपके फाइनेंशियल प्लनिंग में मदद करने के लिए हमारे साथ हैं फाइनेंशियल प्लानर अर्णव पंड्या, और Taxmann.com के सीनियर कंसलटेंट भावेश चंदाराना।


जीएसटी के बाद फूड आइटम पर किस तरह बदलाव आया है। कोल्ड ड्रिंक पर जहां पहले आप 23-24 फीसदी टैक्स देते थे वहीं अब आपको 28 फीसदी टैक्स चुकाना होगा। वहीं एडिबल ऑयल पर 5-6 फीसदी टैक्स लगता था लेकिन अब आपको 5 फीसदी टैक्स देना होगा। फ्रूड जूस पर टैक्स की दरों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। जीएसटी के दरों बैंक, बीमा क्रेडिट कार्ड और म्युचुअल फंड की 15 फीसदी से बढ़कर 18 फीसदी किया गया है।  
         
वहीं एफएमजीसी सेक्टर में टैक्स स्लैब को घटाया गया है। जैसे सिगरेट पर पहले 65 फीसदी टैक्स चुकाना पड़ता था लेकिन अब इसे 28 फीसदी टैक्स स्लैब में डाला गया है। हालांकि पर्सनल केयर पर पहले 26 फीसदी टैक्स चुकाना पड़ता था लेकिन अब 28 फीसदी  टैक्स स्लैब में डाला गया है।


इधर फार्मा सेक्टर में इसे अलग-अलग टैक्स स्लैब में रखा गया है यानि जीवनरक्षक एपीआई पर पहले 5-8 फीसदी टैक्स देना होता था लेकिन अब उसे 5 फीसदी टैक्स स्लैब में डाला गया है जबकि अन्य एपीआई को 18 फीसदी टैक्स स्लैब में रखा गया है। वहीं फॉर्म्यूलेशन को बढ़ाकर 12 फीसदी टैक्स स्लैब में रखा गया है।


सरकारी और प्राइवेट लॉटरी पर अलग-अलग टैक्स दर निर्धारित की गई जिसके तहत राज्य सरकार की लॉटरी पर 12 फीसदी और प्राइवेट लॉटरी पर 28 फीसदी टैक्स लगेगा। शिपिंग इंडस्ट्री का टैक्स घटाकर 5 फीसदी किया गया है। वहीं टेलीकॉम सर्विसेज को 18 फीसदी टैक्स दायरे में रखा गया है।