Moneycontrol » समाचार » टैक्स

घर बैठे कैसे भरेंगे टैक्स रिटर्न, कौन सा रिटर्न फॉर्म है आपके लिए

प्रकाशित Mon, 06, 2016 पर 18:39  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

साल का ये समय होता है, जब हम और आप टैक्स रिटर्न भरने की चिंता से जूझ रहे होते हैं, और अमूमन हम सबकी कोशिश होती है कि हम टैक्स रिटर्न फाइल करना जितना टाल सकें, उतना टाल दें। लेकिन आज का शो देखने के बाद आप टैक्स रिटर्न को टालेंगे नहीं, बल्कि जल्दी से जल्दी फाइल कर देंगे। और आपकी सभी मुश्किलें आसान करने के लिए हमारे साथ हैं दो एक्सपर्ट आईसीएआई के पूर्व प्रेसिडेंट वेद जैन और टैक्सपैनर डॉट कॉम के को-फाउंडर सुधीर कौशिक।


इनकम टैक्स रिटर्न भरने में लोगों को कागज का बिलकुल इस्तेमाल ना करना पड़े, इसके लिए टैक्स विभाग ने ई-आईटीआर की एक और सुविधा शुरू की है। अब ऑनलाइन रिटर्न भरने के लिए एटीएम की मदद से भी वैलिडेशन किया जा सकेगा। इस सुविधा से उन लोगों के लिए भी ऑनलाइन रिटर्न भरना आसान हो जाएगा जिनके पास इंटरनेट की सुविधा नहीं है। जिस बैंक में टैक्सपेयर्स का खाता होगा, वो बैंक उसे एटीएम के प्री-वैलिडेशन के बाद इलेक्ट्रानिक वेरिफिकेशन कोड (ईवीसी) देगा।


एसबीआई ने ये सुविधा शुरू कर दी है, जबकि दूसरे बैंक जल्दी ही इसे शुरू कर सकते हैं। इस सुविधा का फायदा उठाने के लिए टैक्सपेयर्स को incometaxindiaefiling.gov.in पर जाकर रिटर्न भरना होगा। ऑनलाइन रिटर्न भरने के बाद ई-वेरिफिकेशन होने से टैक्सपेयर्स को आईटीआर-5 बंगलुरु के सेंट्रल प्रोसेसिंग सेंटर भेजने की जरूरत नहीं पड़ेगी।


हम आपको यहां बता रहे हैं कि रिटर्न फॉर्म के प्रकार कितने होते हैं। आईटीआर-1 (सहज), आईटीआर-2, आईटीआर-2ए, आईटीआर-3, आईटीआर-4, आईटीआर-4एस (सुगम), आईटीआर-5, आईटीआर-6 और आईटीआर-7 आदि रिटर्न फॉर्म हैं। रिटर्न भरने के लिए जरूरी होता है पैन, फॉर्म 16/16ए, बैंक स्टेटमेंट, एक्जेंप्ट इनकम का ब्यौरा, कैपिटल गेंस का ब्यौरा (अगर हो तो), विदेश में संपत्ति का ब्यौरा (अगर हो तो) और चल-अचल संपत्ति का ब्यौरा। चल-अचल संपत्ति का ब्यौरा, 50 लाख रुपये से ज्यादा इनकम वालों के लिए जरूरी होता है।


आईटीआर-1 की जरूरत किसे पड़ती है, सैलरी, पेंशन या ब्याज आय वालों के लिए इस रिटर्न फॉर्म को भरना पड़ता है। साथ ही एक हाउस प्रॉपर्टी से आय, 5000 तक की कृषि आय (एक्जेंप्ट इनकम) और दूसरे स्रोत से आय वाले व्यक्तियों के लिए आईटीआर-1 के तहत रिटर्न भरना होता है। आईटीआर-2ए की जरूरत सैलरी, पेंशन या ब्याज आय के अलावा कृषि आय 5000 से ज्यादा वालों को होती है। एक से ज्यादा हाउस प्रॉपर्टी और लॉटरी या घुड़दौड़ से आय होने पर आईटीआर-2ए के जरिए रिटर्न फाइल करना होता है।


वहीं आईटीआर-2ए के स्त्रोत के अलावा कैपिटल गेंस इनकम/लॉस और विदेश में संपत्ति या विदेश से आय वाले व्यक्तियों को आईटीआर-2 फॉर्म भरना होता है। टैक्स रिटर्न के मामले में एक बेहद पहलू है शेड्यूल एएल, क्या होता है ये। एएल यानि एसेट्स और लायबिलिटीज, हर रिटर्न फॉर्म में शेड्यूल एएल जोड़ा गया है। 50 लाख से ज्यादा आय वालों को इसका ब्यौरा देना होता है। शेड्यूल एएल में अपनी जायदाद और कर्ज का ब्यौरा देना होता है। शेड्यूल एएल में जमीन/घर, बैंक डिपॉजिट/नकदी, शेयर और सिक्योरिटीज, इंश्योरेंस पॉलिसी, अगर किसी को लोन दिया हो, गहने/बुलियन, आर्टवर्क, एयरक्राफ्ट/यॉट और संपत्ति जुटाने के लिए कोई कर्ज लिया हो इत्यादि जानकारियां देनी होती हैं।


बता दें कि अगर रिफंड क्लेम करना हो तो आपके ई-रिटर्न जरूरी है। साथ ही कुल इनकम 5 लाख से ज्यादा है तो आपके ई-रिटर्न भरना जरूरी है। आईटीआर-3, 4, 5, 6 और 7 भरने वालों को ई-रिटर्न जरूरी है। रिटर्न भरने से आप फायदे में ही रहोगे, क्योंकि इससे टीडीएस रिफंड का क्लेम मुमकिन होता है। लोन के लिए इनकम का प्रूफ बन जाता है। लॉस कैरी फॉरवर्ड करने के लिए रिटर्न भरना जरूरी है। साथ ही वीजा अप्लाई करने के लिए भी रिटर्न भरना जरूरी होता है।


वीडियो देखें