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आईटी रिटर्न में देरी, क्या होगा नुकसान!

प्रकाशित Fri, 18, 2017 पर 13:56  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

अगर आपकी इनकम है तो इनकम टैक्स तो देना ही होगा। लेकिन अगर आपने टैक्स प्लानिंग समझदारी से की तो आप पर टैक्स का बोझ घट जरुर जायेगा। कैसे कम करें अपने टैक्स के बोझ और कैसे करें टैक्स प्लानिंग। आपकी मदद करने के लिए हाजिर है टैक्स गुरु की खास पेशकश जिसमें हमारा साथ देंगे टैक्स एक्सपर्ट प्रीति खुराना।


प्रीति खुराना का कहना है कि आईटी रिटर्न भरने की ड्यू डेट 5 अगस्त थी। 31 मार्च 2018 तक टैक्स रिटर्न फाइल कर सकते है। अगर टैक्स देनदारी होगी तो 234ए के तहत ब्याज देना होगा। एडवांस टैक्स 90 फीसदी नहीं दिया होगा तो 234बी, 234सी के तहत ब्याज देना होगा। देर से रिटर्न फाइल करने वालों को रिफंड पर कम ब्याज मिलेगा।


सवालः एसेसमेंट ईयर 2014-2015 का रिटर्न फाइल नहीं कर पाए थे, क्या अब रिटर्न फाइल किया जा सकता है?


प्रीति खुरानाः एसेसमेंट ईयर 2014-2015 का रिटर्न अब फाइल नहीं हो सकता। 31 मार्च 2016 तक ही एसेसमेंट ईयर 2014-2015 का रिटर्ऩ फाइल किया जा सकता था। बहुत जरुरी हो तो एसेसिंग ऑफिसर से मिलें। ऑफिसर को वजह बताकर रिटर्ऩ भरने की अर्जी दें।


सवालः 2007 में विप्रो के 100 शेयर खरीदे थे, बोनस शेयरों के बाद अब 400 शेयर हो गए है, इन्हें बेचने के बाद टैक्स देनदारी क्या बनेगी। अगर शेयर कंपनी को बायबैक में दिए जाएं तब क्या टैक्स देनदारी होगी?


प्रीति खुरानाः शेयर बाजार में शेयर बेचते हैं तो कैपिटल गेन होगा। 12 महीने के बाद शेयर बेचें तो लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन होता है। बोनस में जो शेयर मिले, उनकी खरीद कीमत शून्य होगी। बोनस शेय़र बेचने पर आपको कैपिटल गेन देना होगा। बायबैक में कंपनी को शेयर देने पर भी आपको टैक्स देना होगा। बायबैक में शेयर देने पर हुए एलटीसीजी पर 20 फीसदी टैक्स देना होगा।