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सुलझाएं टैक्स रिटर्न से जुड़ी अपनी हर उलझन

प्रकाशित Mon, 04, 2016 पर 18:46  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

जब टैक्स रिटर्न भरने का वक्त आता है तो साथ लाता है कई उलझनें और कई सवाल। मसलन किस फॉर्म में भरना होगा टैक्स रिटर्न, बैंक से मिलने वाला ब्याज टैक्स फ्री है या नहीं, कैपिटल गेन हुआ तो किस कॉलम में दिखाएं। लेकिन अब आपको इन सवालों से डरने की जरूरत नहीं है। आपको टैक्स रिटर्न भरने में मदद के लिए सीएनबीसी-आवाज़ लेकर आया है ये खास शो जिसमें आप पूछ सकते हैं सीधे अपने सवाल जिनके जवाब आपको हाथों-हाथ मिलेंगे। यहां आपके टैक्स रिटर्न से जुड़े सवालों के जवाब दे रहे हैं टैक्स एक्सपर्ट शरद कोहली


शरद कोहली ने बताया कि अगर रिफंड क्लेम करना हो, कुल इनकम 5 लाख से ज्यादा हो और आईटीआर-3, 4, 5, 6, 7 भरने वालों के लिए ई-रिटर्न भरना जरूरी है। आईटीआर-1, सैलरी, पेंशन या ब्याज से आय, एक हाउस प्रॉपर्टी से आय, 5,000 रुपये तक की कृषि आय (एक्जेंप्ट इनकम) और दूसरे स्रोत से आय वालों के लिए हैं।


वहीं आईटीआर-2 ए, सैलरी, पेंशन या ब्याज से आय, कृषि आय 5,000 से ज्यादा, एक से ज्यादा हाउस प्रॉपर्टी और लॉटरी या घुड़दौड़ से आय वालों के लिए है। वहीं आईटीआर-2 सैलरी, पेंशन या ब्याज से आय, कृषि आय 5,000 से ज्यादा, एक से ज्यादा हाउस प्रॉपर्टी, कैपिटल गेंस से इनकम/लॉस, विदेश में संपत्ति या विदेश से आय वालों के लिए है।


याद रखे कि रिटर्न भरने की अंतिम तारीख 31 जुलाई है। अगर टीडीएस कटौती हो गई हो तो भी रिटर्न भरना जरूरी है। आय 2.5 लाख से ज्यादा है तो रिटर्न भरना होगा। एक से ज्यादा प्रॉपर्टी होने पर आईटीआर-1 नहीं भर सकते। एक से ज्यादा प्रॉपर्टी होने पर आईटीआर-2 भरना होगा। दूसरे स्रोतों से भी आय होती हो तो शेयर ट्रेडिंग से आय कैपिटल गेन होगी। अगर सिर्फ शेयर ट्रेडिंग से आय होती हो तो उसे बिजनेस इनकम माना जाएगा।


बता दें कि 5,000 रु से कम की कृषि आय, ग्रेच्युटी से मिली रकम, एचआरए का टैक्स फ्री हिस्सा, पेंशन से मिली रकम, नौकरी जाने पर मिला मुआवजा, बीमा पॉलिसी से मिली रकम, निर्वाह भत्ते के तौर पर मिली एकमुश्त रकम, पीएफ मैच्योरिटी पर मिली रकम एक्जेंप्ट इनकम के दायरे में आते हैं।


शरद कोहली ने बताया कि अगर विदेश से आय हो तो विदेश की किसी भी जायदाद/आय को रिटर्न में दिखाएं। ऐसा होने पर आप आईटीआर-1, 2ए, 4एस नहीं भर सकते। ये सारी जानकारी आपको शेड्यूल एफए में देनी होगी। शरद कोहली ने बताया कि वेरिफिकेशन के बिना रिटर्न फाइलिंग पूरी नहीं होती इस लिए वेरिफिकेशन जरूरी होता है। वेरिफिकेशन के लिए आप आईटीआर-V पर दस्तखत कर स्पीड पोस्ट से सीपीसी, बंगलुरू भेज सकते हैं। इसके अलावा ई-वेरिफिकेशन का भी विकल्प है जिसके तहत आधार या नेटबैंकिंग के जरिए ई-वेरिफिकेशन मुमकिन है।


सवाल: जून 2015 में पिछले एंप्लॉयर से मिली पीएफ की रकम निकाली जिस पर 30 फीसदी टीडीएस कट गया। मेरी इनकम पर भी टैक्स कटा है। अब रिटर्न में दोनों टैक्स किस तरह दिखाएं और क्या एक्स्ट्रा टैक्स रिफंड हो जाएगा?


जवाब: आप फार्म-1 या सहज फार्म में रिटर्न फाइल कर सकते हैं। आप अपने दोनों कटे हुए टैक्स दिखाएं। आपकी जो कुल इनकम होगी उसके हिसाब अगर आपसे टैक्स अतिरिक्त टैक्स लिया गया है तो आपको रिटर्न मिलेगा।


सवाल: मैं एसआईपी के जरिए म्युचुअल फंड में निवेश कर रहा हूं, 30 फीसदी टैक्स स्लैब में आता हूं, क्या हर साल टैक्स रिटर्न में एसआईपी का निवेश दिखाना होगा?


जवाब: एसआईपी में निवेश धारा 80 सी के तहत 1,50,000 रुपये तक की लिमिट मे ये कवर होता है। शर्त ये हैं कि एसआईपी में निवेश इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम के तहत होनी चाहिए। अगर आप इक्विटी लिंक्ड एसआईपी में निवेश कर रहें तो 1,50,000 रुपये आप क्लेम कर सकते हैं।


सवाल: मेरी आय का स्रोत पेंशन और बैंक का ब्याज है, बैंक ने ब्याज पर टीडीएस काटा है और मैंने सहज फॉर्म में रिटर्न फाइल किया है। पीपीएफ से हुई ब्याज आय को कहां दिखाना होगा?


जवाब: आप सहज फार्म भर सकते हैं। पीपीएफ से आने वाला ब्याज एक्जेंप्ट इनकम में आता है। सहज फार्म में आप पीपीएफ से हुई ब्याज आय को दिखा सकते हैं लेकिन इस पर टैक्स नहीं लगेगा।


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