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मोटी खरीदारी की तैयारी, टैक्स विभाग से कैसे बचें

प्रकाशित Wed, 02, 2016 पर 18:23  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

टैक्स एक ऐसा शब्द है जिसे सुनते ही आम आदमी ही नहीं जानकार भी घबराने लगते हैं। फेस्टिव सीजन में शादियों का मौका हो तो खर्च ज्यादा हो ही जाता है। ढ़ेरों सारी शॉपिग भी करते है। लेकिन जब आप ढ़ेरों शॉपिग करेंगे तो हो सकता है कि टैक्स विभाग आपके हर खर्च का ब्यौरा रख रहा हो।


टैक्स गुरु में फोकस करेंगे त्यौहार और शादी के सीजन में बड़ी खरीदारी करनी हो तो कैसे बचें टैक्स विभाग की तेढ़ी नजर से और एसएमएस पर मिलेगी टीडीएस की जानकारी, जानेगें कि क्या होगा इसका फायदा।इस पर जानकारी देनें के लिए हमारे साथ मौजूद है टैक्स एक्सपर्ट शरद कोहली।


टैक्स एक्सपर्ट शरद कोहली का कहना है कि अगर 2 लाख रुपये से ज्यादा का ट्रांजेक्शन हो या क्रेडिट कार्ड से सालाना 2 लाख रुपये की शॉपिंग पर आयकर विभाग की नजर होती है। वहीं अगर सेविंग्स बैंक एकाउंट या एफडी में 10 लाख रुपये से ज्यादा का डिपॉजिट किया या करंट बैंक एकाउंट में 50 लाख रुपये से ज्यादा का डिपॉजिट कर दिया हो तो वह आयकर विभाग के नजरों में आ जाता है।


वहीं अगर म्युचुअल फंड में 2 लाख रुपये से ज्यादा खरीदें तो भी आयकर विभाग के नजरों में आ जाता है और इसकी जानकारी रजिस्ट्रार ऑफ प्रॉपर्टीज, बैंक, म्युचुअल फंड कंपनियां, इन्वेस्टमेंट कंपनियां देती है। जिसके चलते करदाता को कुछ बातों का ध्यान रखना होगा। जैसे कि करदाता पेन कार्ड का नंबर सहीं तरीके से बताएं। शॉपिंग की रसीद संभालकर ऱखें और जिस बैंक से पैसे निकाले हो उसकी स्टेटमेंट संभालकर रखें। साथ ही आमदनी से अधिक खर्च ना करें।


सवालः सालाना आमदनी 12 लाख रुपये के करीब है। वहीं पत्नी की सालाना आमदनी 4 लाख रुपये है। हम दोनों ही अलग- अलग टैक्स डिडेक्शन के लिए तकरीबन 1.5 लाख रुपये सेविंग करते है। क्या अपनी पत्नी के लिए एलआईसी प्रीमियम और ईपीएफ की साझेदारी अपने सेविंग एकाउंट से कर सकता हूं। जिसका क्लेम मेरी पत्नी इनकम टैक्स रिटर्न से लेंगी।


शरद कोहलीः पत्नी के नाम पर निवेश करेगें तो भी टैक्स बेनेफिट आपको मिलेंगे। पत्नी को निवेश पर टैक्स बेनेफिट तभी मिल सकता है जब निवश उनके एकाउंट से हो। आप अपने पत्नी को तोहफे में निवेश की रकम दे सकते है। गिफ्ट की रकम के निवेश पर मिले रिटर्न पर क्लबिंग का प्रावधान का ख्याल रखें।


सवालः पिताजी का 2014 में देहांत हो गया था और उसके बाद उनकी जायदाद 3 बच्चों में बांट दी गई। इसे बेचने पर एनआरआई होने के नाते टैक्स के किन नियमों का ख्याल रखना होगा।


शरद कोहलीः सेक्शन 56(2) के तहत विरासत में मिली जायदाद पर कोई टैक्स नहीं होता। हालांकि जब आप प्रॉपर्टी बेचेंगे तो कैपिटल गेन पर टैक्स देना होगा। प्रॉपर्टी से होने वाले किसी भी इनकम पर टैक्स देना होगा। एनआरआई को भारत में होने वाली किसी भी आय पर आम भारतीय की तरह टैक्स देना होता है।