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टैक्स गुरुः समझें एनपीएस की बारीकियां

प्रकाशित Sat, 26, 2016 पर 16:27  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

टैक्स से जुड़ी आपकी सारी उलझन दूर करने के लिए जुड़ेंगी क्लियरटैक्स डॉटइन की चीफ एडिटर प्रीति खुराना। 
 
छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दर घटने के बाद क्या हैं विकल्प


सरकार ने छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दर में कटौती की। पीपीएफ, एनएससी, सुकन्या समृध्दी स्कीम समेत कई छोटी निवेश योजनाओं पर कम ब्याज मिलेगा। 1 अप्रैल 2016 के पहले छोटी निवेश योजनाओं में ज्यादा निवेश कर फायदा उठा सकते हैं। पीपीएफ में निवेश जारी रखना बेहतर होगा। पोस्ट टैक्स रिटर्न अभी भी पीपीएफ में बेहतर है। आने वाली तिमाहियों में ब्याज दरों में और कमी आ सकती है। पीपीएफ लंबी अवधि का निवेश है, इसलिए बने रहना बेहतर होगा।     


क्या हैं एनपीएस के नियम, समझें इसकी बारीकियां


एनपीएस यानि नेशनल पेंशन सिस्टम 1 जनवरी 2004 से लागू हुआ है। एनपीएस केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए अनिवार्य है। सेना के लोगों के लिए एनपीएस अकाउंट अनिवार्य नहीं है। सेना में काम कर रहे लोग खुद एनपीएस अकाउंट खोल सकते हैं। भारत का कोई भी नागरिक एनपीएस अकाउंट खोल सकते हैं।


सेक्शन 80सीसएीडी(1बी) में टैक्स छूट के लिए आपकी पत्नी का एनपीएस अकाउंट होना जरुरी है। सेक्शन 80सीसीडी(1बी) के तहत 50,000 रु तक की अधिकतम टैक्स छूट मिल सकती है। अपने नाम पर खोले गए एनपीएस अकाउंट का फायदा आपको मिल सकता है। आप अपनी पत्नी के लिए दूसरे पेंशन फंड में भी निवेश कर सकते हैं। या पत्नी को 100 फीसदी का नॉमिनी बना सकते हैं।


एनपीएस में आपकी कंपनी का योगदान टैक्सेबल इनकम में नहीं जुड़ेंगा। सेक्शन 80सीसीडी(2) के तहत कंपनी के योगदान पर टैक्स छूट क्लेम कर सकते हैं। कंपनी के योगदान पर सैलरी के अधिकतम 10 फीसदी तक की छूट मान्य होगी। एनपीएस में कर्मचारी के योगदान की कोई अधिकतम सीमा नहीं है।     


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