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टैक्स गुरुः कैसे करें इंश्योरेंस से टैक्स बचत!

प्रकाशित Thu, 22, 2016 पर 18:26  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

टैक्स एक ऐसा शब्द है जिसे सुनते ही आम आदमी ही नहीं जानकार भी घबराने लगते हैं। कारण है कि आयकर कानूनों में इतने सारे पेंच है कि किसी के लिए भी इन्हें समझना टेढ़ी खीर साबित हो सकती है। ऐसे ही मौकों पर टैक्स गुरू अपनी जानकारी और अनुभव का खजाना लेकर आते हैं और करते हैं टैक्स से जुड़ी मुश्किलों को दूर। आज आपके टैक्स से जुड़े मुश्किल सवालों का जवाब देंगे टैक्स एक्सपर्ट बलवंत जैन और रीजनल मैनेजर- मार्केटिंग एलआईसी के अशोक कुमार शर्मा की राय।


रीजनल मैनेजर- मार्केटिंग एलआईसी के अशोक कुमार शर्मा का कहना है कि टैक्स प्लानिंग का इंश्योरेंस अहम हिस्सा है। लाइफ इंश्योरेंस के लिए सेक्शऩ 80 सी के तहत 1.5 लाख रुपये तक की छूट मिलती है। वहीं हेल्थ इंश्योरेंस के लिए सेक्शन 80 डी में 55,000 रुपये तक की छूट होती है। इंश्योरेंस के साथ रिटायरमेंट प्लानिंग, इन्वेस्टमेंट प्लानिंग और एस्टेट प्लानिंग जुड़े होते है।


एलआईसी की 5 फीसदी से भी कम पॉलिसी में मैच्योरिटी पर मिलने वाली रकम टैक्सबेल होती है। टैक्स देनदारी को ध्यान में रखकर ही एलआईसी की पॉलिसी डिजाइन की जाती है। पॉलिसी सरेंडर करने से कंपनी और पॉलिसीहोल्डरों दोनों का नुकसान होता है। सरेंडर वैल्यू तभी मिलती है जब कम से कम 3 साल प्रीमियम दिया गया हो।


अशोक कुमार शर्मा के मुताबिक शुरु के वर्षों में इंश्योरेंस कंपनी के लिए पॉलिसी की लागत ज्यादा होती है। इसलिए पॉलिसी तभी सरेडर करें जब कोई विकल्प पॉलिसी धारकों के पास ना हो। पहले साल का प्रीमियम घटाकर बाकी सालों के प्रीमियम का न्यूनतम 30 फीसदी सरेंडर वैल्यू मिलता है। सिंगल प्रीमियम और रेगुलर प्रीमियम पॉलिसी में सरेंडर की वैल्यू अलग - अलग तरीके से दी जाती है। समय पर पॉलिसी की प्रीमियम को भरते रहें औक मासिक प्रीमियम की पॉलिसी में ग्रेस पीरियड 15 दिन की होती है। अगर ग्रेस पीरियड में प्रीमियम नहीं देने पर पॉलिसी लैप्स हो जाती है।


अशोक कुमार शर्मा का कहना है कि पॉलिसीहोल्डर बकाया प्रीमियम चुकाकर पॉलिसी को रिवाइव करा सकते है। इंश्योरेंस केवल टैक्स बचाने के मकसद से ना करेंष बल्कि इंश्योरेंस पॉलिसी अपने भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए करना चाहिए।


टैक्स एक्सपर्ट बलवंत जैन का कहना है कि इंश्योरेंस कंपनी से मिलने वाली हर रकम पूरी तरह टैक्स फ्री नहीं होती है। इंश्योरेंस पॉलिसी में डेथ क्लेम की रकम पर कोई टैक्स नहीं लगता। टैक्स छूट के लिए सालाना प्रीमियम सम एश्योर्ड के 10 फीसदी से ज्यादा नहीं होता है। 1 अप्रैल 2012 के पहले की पॉलिसी में सालाना प्रीमियम सम एश्योर्ड के 20 फीसदी से ज्यादा नहीं होना चाहिए।