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टैक्स गुरुः सेक्शन 245 के तहत मिला नोटिस, कैसे दें जवाब

प्रकाशित Mon, 25, 2017 पर 13:22  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

टैक्स एक ऐसा शब्द है जिसे सुनते ही आम आदमी ही नहीं जानकार भी घबराने लगते हैं। कारण है कि आयकर कानूनों में इतने सारे पेंच है कि किसी के लिए भी इन्हें समझना टेढ़ी खीर साबित हो सकती है। इनकम टैक्स भरने का समय करीब आ रहा है जरुरी है कि आप इनसे जुड़े नियमों में बदलाव को जाने और समझें। ऐसे ही मौकों पर टैक्स गुरू अपनी जानकारी और अनुभव का खजाना लेकर आते हैं और करते हैं टैक्स से जुड़ी मुश्किलों को दूर। आज आपके टैक्स से जुड़े मुश्किल सवालों का जवाब देंगे टैक्स एक्सपर्ट अमिताभ सिंह की राय।
            
सेक्शन 245 के तहत नोटिस, क्या करें


अमिताभ सिंह का कहना है कि सेक्शन 245 टैक्स रिफंड को पुरानी डिमांड से एडजस्ट करने का अदिकार देती है। पिछले सालों का अगर टैक्स बाकी है तो आयकर विभाग सेक्शन 215 के तहत टैक्सपेयर्स का रिफंड बचे हुए टैक्स से काट सकता है। रिफंड एडजस्ट करने से पहले टैक्सपेयर को इसकी जानकारी इस नोटिस के जरिए दी जाती है। इस नोटिस का जबाव ऑनलाइन दिया जा सकता है। सबसे पहले टैक्सपेयर्स देखें कि आयकर विभाग की टैक्स डिमांड सहीं है या नहीं। अगर डिमांड गलत है तो टैक्सपेयर ऑनलाइन ही इस नोटिस का जबाव डिमांड नहीं बनती है से दे सकते है और अगर डिमांड सही है तो आप आयकर विभाग तो टैक्स एडजस्ट करने को कहें। 30 के अंदर इस नोटिस का जवाब देना होता है। 


लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन और आप


लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन बचाने के लिए प्रॉपर्टी में निवेश कर सकते है लेकिन प्रॉपर्टी समय से मिलने पर ही आपको टैक्स छूट मिल सकती है। रेडी टू मूव प्रॉपर्टी पर 2 साल की मियाद जरुरी होती है। अंडर कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी 3 साल में बन कर तैयार हो जानी चाहिए क्योंकि समय पर पजेशन नहीं मिला तो लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स में छूट नहीं मिलेगी। अंडर कंस्ट्रक्शऩ प्रॉपर्टी के देरी के कुछ मामलों में कोर्ट ने खरीदारों के हक में फैसला दिया है।