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टैक्स गुरुः जानें किनके लिए इनकम डिक्लिेरेशन स्कीम

प्रकाशित Wed, 14, 2016 पर 14:44  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

टैक्स सेविंग से लेकर टैक्स प्लानिंग तक के लिए हमारी कोशिश होती है कि हम आपको ऐसे आसान टिप्स दें कि आपका टैक्स भी बचें और आप भी अपने टैक्स को समझें ना कि टैक्स से डरें। आज टैक्स गुरु में फोसक करेंगे आईडीएस की बारिकियां। आज आपके टैक्स से जुड़े मुश्किल सवालों का जवाब देंगे टैक्स एक्सपर्ट शरद कोहली।


शरद कोहली का कहना है कि आईडीएस इनकम डिक्लेरेशन स्कीम 1 जून 2016 से यह स्कीम लागू है। 30 सितंबर तक जारी रहेगी। काले धन को बाहर लाने के लिए यह स्कीम बनाई गई। अतीत में टैक्स ना चुकाया हो करे जायदाद का खुलासा इस स्कीम के तहत किया जायेगा। घोषित की जामे वाली जाय़दाद का 45 फीसदी टैक्स देना होगा। इस टैक्स को किस्तों में चुकाने में सरकार ने कुछ सुविधा भी दी है। जिसके तहत नवंबर 2016 तक 25 फीसदी टैक्स दे सकते है। मार्च 2017 तक और 25 फीसदी टैक्स दे सकते है।


शरद कोहली के मुताबिक योजना के तहत नगदी में भी टैक्स जमा किया जा सकता है। इसके तहत काला धन घोषित करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी। काला धन घोषित करने वालों का नाम पुरी तरह से गुप्त रखा जायेगा। 


सवालः विदेश में सोशल सिक्योरिटी का काम करता था। सोशल सिक्योरिटी के पर रिफंड निकालना चाहता हूं। तो क्या पैसा भारत लाने पर टैक्स लगेगा।


शरद कोहलीः डीटीएए के मुताबिक एक आय पर दोबारा टैक्स नहीं लगता। जर्मनी में आपने इनकम पर टैक्स दिया है इसलिए फिर से टैक्स नहीं देना होगा। आपको मिलने वाली सोशल सिक्योरिटी की राशि भारत में टैक्स फ्री है।


सवालः सन 1981 के पहले प्रॉपर्टी की खरीदारी की गई थी। लेकिन किसी कारणवंश 2016 में प्रॉपर्टी का रजिस्टेंशन हुआ है। इनकम टैक्स में ट्रार्जेकेशन किस तरह से चुकाना होगा।


शरद कोहलीः आपकी प्रॉपर्टी की खरीद कीमत 1 अप्रैल 1981 की मानी जाएंगी। जिसके तहत 1 अप्रैल 1981 का कॉस्ट इनफ्लेकशन इंडेक्स 100 माना जाएंगा। और हाउस प्रॉपर्टी की ब्रिकी पर कैपिटल गेन टैक्स 20 फीसदी लगता है। अगर कम कीमत में रजिस्ट्री हुई हो तो भी सर्किल रेट ही मान्य होगी।