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टैक्स गुरुः सुलझाएं टैक्स से जुड़ी तमाम उलझनें

प्रकाशित Thu, 24, 2017 पर 15:22  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

टैक्स एक ऐसा शब्द है जिसे सुनते ही आम आदमी ही नहीं जानकार भी घबराने लगते हैं। कारण है कि आयकर कानूनों में इतने सारे पेंच है कि किसी के लिए भी इन्हें समझना टेढ़ी खीर साबित हो सकती है। इनकम टैक्स भरने का समय करीब आ रहा है जरुरी है कि आप इनसे जुड़े नियमों में बदलाव को जाने और समझें। ऐसे ही मौकों पर टैक्स गुरू अपनी जानकारी और अनुभव का खजाना लेकर आते हैं और करते हैं टैक्स से जुड़ी मुश्किलों को दूर। आज आपके टैक्स से जुड़े मुश्किल सवालों का जवाब देंगे टैक्स एक्सपर्ट बलवंत जैन की राय।


बलवंत जैन का कहना है कि आईटी रिटर्न फाइल करने के बाद भूल का पता चलने पर उसे रिवाइज किया जा सकता है। वित्त वर्ष 2016-2017 के रिटर्न मार्च 2019 तक के रिवाइज किए जा सकते है। वित्त वर्ष 2015-2016 के रिटर्न मार्च 2018 तक के रिवाइज किए जा सकते है।


सवालः 19 जून को अपना आईटीआर फाइल किया और फॉर्म 26एएस के मुताबिक जितना रिफंड क्लेम किया वो मिल गया है। अब पता चला है कि फॉर्म 26एएस में रिवीजन के बाद रिफंड ज्यादा बनता था। एक्स्ट्रा रिफंड कैसे मिलेगा?


बलवंत जैनः एसेसमेंट के बाद रिटर्न रिवाइज नहीं हो सकता है। आपको रेक्टिफिकेशन की अर्जी देनी होगी। हो सकती है कि आपकी टैक्स देनदारी भी बढ़ी हो। 


सवालः सेक्शन 143 (1ए) के तहत नोटिस आया है और डिडक्शन पर आयकर विभाग ने सवाल उठाए है, क्या करना चाहिए?


बलवंत जैनः सेक्शन 143 (1ए) में संशोधन किया गया है। आब आईटीआर फॉर्म 16, 16ए या फॉर्म 26एएस के आंकड़ो में फर्क हो तो सफाई देनी पड़ती है। इनकम टैक्स विभाग की वेबसाइट पर लॉग इन करें। ई- प्रोसिडिंग सेक्शन में जाकर बताएं कि आईटीआर फॉर्म और फॉर्म 16 में अंतर क्यों हैं।


सवालः इलाज के लिए अपने पिता से 1.5 लाख रुपये मिले हैं, क्या इस रकम पर कोई टैक्स देनदारी बनेगी?


बलवंत जैनः पिता से मिले पैसे को आप लोन या गिफ्ट मान सकते है। रिश्तेदार से मिले गिफ्ट पर कोई टैक्स नहीं लगता है। आपको या आपके पिता को कोई टैक्स नहीं देना पड़ेगा।