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टैक्स गुरुः समझें कैशबैक पर टैक्स का गणित

प्रकाशित Thu, 17, 2018 पर 14:23  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

टैक्स एक ऐसा शब्द है जिसे सुनते ही आम आदमी ही नहीं जानकार भी घबराने लगते हैं। कारण है कि आयकर कानूनों में इतने सारे पेंच है कि किसी के लिए भी इन्हें समझना टेढ़ी खीर साबित हो सकती है। इनकम टैक्स भरने का समय करीब आ रहा है जरुरी है कि आप इनसे जुड़े नियमों में बदलाव को जाने और समझें। ऐसे ही मौकों पर टैक्स गुरू अपनी जानकारी और अनुभव का खजाना लेकर आते हैं और करते हैं टैक्स से जुड़ी मुश्किलों को दूर। आज आपके टैक्स से जुड़े मुश्किल सवालों का जवाब देंगे टैक्स एक्सपर्ट मुकेश पटेल की सलाह।


मुकेश पटेल का कहना है कि कैशबैक पर टैक्स की गणित समझना बेहद जरुरी है। कैशबैक पर टैक्स की देनदारी नहीं बनती है, क्योंकि  कैशबैक डिस्काउंट की तरह होता है। हालांकि इसका ख्याल कारोबारी और प्रोफेशनल को रखना होगा। रेवेन्यू एक्सपेंडीचर कैशबैक घटाने के बाद क्लेम कर पाएंगे। कैपिटल एक्सपेंडीचर के वक्त कीमत में से कैशबै क घटाकर ही डेप्रीसिएशन का फायदा लेगें। इनाम जीतने पर पूरा पैसा नहीं मिलता है। सेक्शन 115बी के तहत 30 फीसदी टैक्स +4 फीसदी सेस और सरचार्ज का प्रावधान है। सबसे उपर समान फ्लैट 30 फीसदी टैक्स +4 फीसदी सेस और सरचार्ज लगेगा। इनाम में कोई सामान मिला तो टीडीएस देना होगा।


सवालः पिता जी ने 1982 में को -ओपरेटिव हाउसिंग सोसाईटी में एक फ्लैट 19600 में खरीदा था जो इन्होने जून 2017 में 15.5 लाख में बेच दिया है। दोनों को 7.74 लाख रुपये मिले। मैनें जून 2017 में इन पैसों को आरईसी बॉन्ड में निवेश किया। इसपर कितना कैपिटल गेन इस पर बनता है और कौन सा रिटर्न कैपिटल गेन दिखाने के लिए भरना चाहिए। पिता की मृत्यु 2016 में हो गई थी और अप्रैल 2016 में इन दोनों बहनों के नाम पर फ्लैट ट्रासंफर हो गया था।


मुकेश पटेलः आपकी सिस्टर इन लॉ को आईटीआर 2 भरना होगा और आपको लॉन्ग टर्म गेन माना जाएगा। 2001 की फेयर वैल्यू के हिसाब से इंडेक्सेशन के बाद टैक्स लगना चाहिए। कैपिटल गेन बॉन्ड में निवेश की वजह से टैक्स नहीं लगेगा। आईटीआर -2 में कैपिटल गेन दिखाइए, टैक्स नहीं बनता है।