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टैक्स गुरुः नए वित्त वर्ष में किन बातों का रखना है ध्यान

प्रकाशित Wed, 29, 2017 पर 19:11  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

1 अप्रैल 2017 यानि नए फाइनेशिंयल इयर की शुरुआत हो रही है और इनकम टैक्स से जुड़े ढ़ेरों नियम बदल रहे है। इन नियमों को आपके लिए जानना और समझना बेहद जरुरी है। क्योंकि यह ना केवल फाइनेशिंयल इयर 2017-18 के परफेक्ट प्लानिंग में आपकी मदद करेंगे बल्कि आपके लिए टैक्स भरना औऱ रिटर्न फाइल करना आसान बना देगें। लेकिन यह आपके लिए तभी आसान होगा जब आप इनके नियमों को समझेगे। इसलिए नए साल टैक्स से जुड़िये और हर काम की बात आज टैक्स गुरु आपको बता रहा है और इसमें हमारी मदद करेंगे टैक्स एक्सपर्ट शरद कोहली।


टैक्स गुरु में हम फोकस करेंगे कि क्यों आपके लिए जरुरी हो गया है आधार नंबर और टैक्स प्लानिंग के जरिए अब कैसे बचेंगे। 


टैक्स एक्सपर्ट शरद कोहली का कहना है कि आधार को पेन कॉर्ड से जोड़ना सरकार ने अनिवार्य बनाया है और टैक्स रिटर्न भऱने के लिए भी आधार को जरुरी कर दिया गया है। इनकम टैक्स विभाग की वेबसाइट पर जाएं और लॉग इन आईडी, पासवर्ड और जन्म तिथी डालें। खाली बॉक्स में आधार नंबर लिखना होगा। आधार कार्ड में दिए गए डिटेल्स देखें। आधार के डिटेल्स पेन से मेल खाने चाहिए। आधार और पेन के डिटेल्स में अंतर हैं तो उन्हें दूर करा लें। आधार में गड़बड़ी हो तो आधार सेंटर जाएं और पेन में गड़बड़ी हो तो एनएसडीएल की वेबसाइट की मदद से सुधारें। 31 दिसंबर तक हर किसी के लिए आधार को पेन से जाड़ना जरुरी है।


शरद कोहली के मुताबिक देश में करीब 29 करोड़ पेन कार्ड है और आईटी रिटर्ऩ भरने वालों की संख्या सिर्फ 6 करोड़ है। 31 दिसंबर तक आधार को पेन से नहीं जोड़ने पर पेन कार्ड अमान्य होगा।  


सरकार एक पेज का नया रिटर्न फॉर्म लाएगी और सैलरीड इनकम वालों के लिए एक पेज फॉर्म होगा। 50 लाख तक की सैलरीड इनकम वालों के लिए एक पेज रिटर्न फॉर्म है। हालांकि अन्य स्त्रोत से आय के बारे में स्पष्टीकरण नहीं है।


शरद कोहली के अनुसार रिटर्न भरने में देरी बिलकुल ना करें। नए कारोबारी साल से रिटर्न भऱने में देरी पर पेनल्टी ली जायेगी।  क्योंकि अंतिम तारीख के बाद 31 दिसंबर तक रिटर्न भरा तो 5000 रुपये की फीस लगाई जायेगी। अगर  31 दिसंबर के बाद रिटर्न भरा तो 10000 रुपये जुर्माने के तौर पर फीस ली जायेगी। 5 लाख रुपये तक की आय वालों के लिए 1000 रुपये की फीस लगाई जायेगी। 


टैक्स स्लैब में बदलाव के लिए सरकार ने छोटे करदाताओं को राहत दी है। अब 5 लाख रुपये तक की आय वालों को सिर्फ 5 फीसदी टैक्स देना होगा। वहीं 5 लाख से ज्यादा आय पर टैक्स दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।