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टैक्स गुरुः जानें किसे मिलती है ई-रिटर्न से छूट

प्रकाशित Thu, 25, 2017 पर 18:29  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

टैक्स एक ऐसा शब्द है जिसे सुनते ही आम आदमी ही नहीं जानकार भी घबराने लगते हैं। कारण है कि आयकर कानूनों में इतने सारे पेंच है कि किसी के लिए भी इन्हें समझना टेढ़ी खीर साबित हो सकती है। इनकम टैक्स भरने का समय करीब आ रहा है जरुरी है कि आप इनसे जुड़े नियमों में बदलाव को जाने और समझें। ऐसे ही मौकों पर टैक्स गुरू अपनी जानकारी और अनुभव का खजाना लेकर आते हैं और करते हैं टैक्स से जुड़ी मुश्किलों को दूर। क्यों आज आपके टैक्स से जुड़े मुश्किल सवालों का जवाब देंगे टैक्स एक्सपर्ट बलवंत जैन की राय।


बलवंत जैन का कहना है कि भारत में होनेवाली किसी भी इनकम पर भारत में टैक्स देना होगा। एनआरआई की प्रॉपर्टी भारत में इसलिए उसे बेचने पर टैक्स लगेगा। जिसके तहत 2 साल से ज्यादा समय तक रखने के बाद प्रॉपर्टी बेचने पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगता है। लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन से छूट के लिए उसे रिहायशी प्रॉपर्टी में लगाना होगा। साथ ही आरईसी या एनएचएआई के बॉन्ड में निवेश से भी लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स से छूट मिलती है। लेकिन निवेश नहीं करने में  लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर 20 फीसदी टैक्स देना होगा। प्रॉपर्टी खरीदने वाले को टैक्स की रकम काटकर जमा करानी होती है। एनआईआर को कैपिटल गेन में बेसिक एक्जेंप्शन लिमिट का बेनेफिट नहीं मिलेगा। 


बलवंत जैन का कहना है कि 80 साल या ज्यादा की उम्र वालों को ई-रिटर्न भरने से छूट मिलती है। 5 लाख से कम गैर- व्यापार आय वालों को ई-रिटर्न भरने से छूट दिया गया है। जिन्हें रिफंड चाहिए उनके लिए ई-रिटर्न फाइल करना अनिवार्य है। ई-रिटर्न भरने के बाद वेरिफिकेशन भी जरुरी होता है। वेरिफिकेशन  के लिए डिजिटल सिग्नेचर या ईवीसी का तरीका आपना सकते है। साथ ही आईटीआर- वी की कॉपी सीपीसी, बेंगलुरु भेज सकते हैं।


सवालः 31 दिसंबर 2016 को नौकरी से रिटायर्ड हुई, 2016-2017 के लिए इनकम टैक्स 15 मार्च के पहले चुका दिया था लेकिन 24 मार्च को संस्थान की तरफ से बकाया वेतन मिला, टैक्स की गणना कैसे करें?


बलवंत जैनः आप एरियर को वित्त वर्ष 2016-2017 की इनकम से जोड़ लें। गणना करें कि और टैक्स देने की जरुरत है या नहीं इसे देखें। अगर टैक्स देने की जरुरत हो तो सेल्फ- एसेसमेंट टैक्स की तरह भर दें। सीनियर सिटीजन को एडवांस टैक्स देने की जरुरत नहीं होती हैं। 


सवालः एक प्राइवेट कंपनी में काम करता हूं। पिता एचयूएफ के कर्ता थे जिनके निधन के बाद मैं कर्ता हूं। पैतृक निवास में रहते है और उसका किराया एचयूएफ को देता हूं। क्य़ा इनकम टैक्स कानून के तहत एचआरए क्लेम किया जा सकता है?


बलवंत जैनः इनकम टैक्स कानून की नजर में एचयूएफ और कर्ता दो अलग टैक्स व्यक्तित्व है। आप एचयूएफ के साथ रेंट एग्रीमेंट जरुर बनवाएं और चुकाए गए किराये की रसीद भी रखें। एचयूएफ को किराया देकर आप एचआरए क्लेम कर सकते है।