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टैक्स गुरुः टीडीएस को समझना क्यों है जरुरी

प्रकाशित Sat, 17, 2016 पर 17:34  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

टैक्स एक ऐसा शब्द है जिसे सुनते ही आम आदमी ही नहीं जानकार भी घबराने लगते हैं। कारण है कि आयकर कानूनों में इतने सारे पेंच है कि किसी के लिए भी इन्हें समझना टेढ़ी खीर साबित हो सकती है। ऐसे ही मौकों पर टैक्स गुरू अपनी जानकारी और अनुभव का खजाना लेकर आते हैं और करते हैं टैक्स से जुड़ी मुश्किलों को दूर। आज आपके टैक्स से जुड़े मुश्किल सवालों का जवाब देंगे सक्षम वेंचर्स के फाउंडर अमिताभ सिंह।


अमिताभ सिंह का कहना है कि टीडीएस यानि टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स। टीडीएस का मतलब ये नहीं होता कि टैक्स देनदारी खत्म हो गई है। टीडीएस आपको होने वाले भुगतान पर काटा जाता है। आपको अपनी वास्तविक टैक्स देनदारी का आकलन करना चाहिए। एडवांस टैक्स या सेल्फ एसेसमेंट टैक्स के तौर पर वाजिब टैक्स चुकाएं। जिस रकम पर टीडीएस कटा है उसे अपने आईटी रिटर्न में जरुर दिखाएं।


सवालः सरकारी जॉब में है अपने माता-पिता से थोड़ी दूर रहते है। माता-पिता को मनी ट्रांसफर करना है। क्या मनी ट्रांसफऱ पर क्या टैक्स लाइब्रिलिटी बनेगी।


अमिताभ सिंहः माता- पिता को आप जितनी चाहें, उतनी रकम ट्रांसफऱ कर सकते है। आपकी दी गई रकम माता- पिता की इनकम नहीं मानी जाएगी। माता- पिता ट्रांसफर की गई रकम का निवेश करेंगे तो ब्याज उनकी इनकम होगी। निवेश पर मिले ब्याज को इनकम में जोडकर उन पर टैक्स देना होगा।


सवालः अंडरकस्ट्रकशन प्रॉपर्टी के लिए होम लोन चाहिए और कस्ट्रकशन को पूरा काम होने पर 2 साल का अभी औऱ वक्त लगेगा। तो इसपर टैक्स का किस तरह लगेगा।


अमिताभ सिंहः फ्लैट बनने के बाद उसके ब्याज पर टैक्स छूट क्लेम कर सकते है। फ्लैट बनने के बाद 5 सालों तक ब्याज पर टैक्स छूट मिलती है।  5 साल तक बराबर किस्तों में टैक्स छूट क्लेम कर सकते है. घर किराये पर दिया तो ब्याज पर टैक्स छूट की कोई सीमा नहीं होगी। घर में खुद रहते हो तो सिर्फ एक प्रॉपर्टी पर टैक्स छूट मिल सकती है।