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टैक्स अलाउंस और टैक्स डिडक्शन, जानें क्या है अंतर

प्रकाशित Fri, 04, 2017 पर 14:20  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

अगर आपकी इनकम है तो इनकम टैक्स तो देना ही होगा। लेकिन अगर आपने टैक्स प्लानिंग समझदारी से की तो आप पर टैक्स का बोझ घट जरुर जायेगा। कैसे कम करें अपने टैक्स के बोझ और कैसे करें टैक्स प्लानिंग। आपकी मदद करने के लिए हाजिर है टैक्स गुरु की खास पेशकश जिसमें हमारा साथ देंगे टैक्स एक्सपर्ट अमिताभ सिंह।


अमिताभ सिंह का कहना है कि अक्सर टैक्सपेयर्स टैक्स अलाउंस और डिडक्शन को लेकर असमजंस की स्थिति में रहता है। दरअसल, अलाउंस, डिडक्शन और एक्जेंशन के मतलब अलग अलग है। कई अलाउंमस हमारी सैलेरी का हिस्सा होते है। कई अलाउंस पर टैक्स के लिए कोई सबूत नहीं देना होता है जैसे कन्वेयंस अलाउंस। कई अलाउंस पर टैक्स छूट के लिए सबूत देना होता है जैसे एचआरए। वहीं घर किराये की इनकम पर मिलने वाला 30 फीसदी डिडक्शन भी एक तरह का अलाउंस ही होता है। डिडशक्शन पर टैक्स छूट के लिए आपको 80सी डिडक्शंस सबूत देने होते है। ध्यान रहें अलाउंस आपकी इनकम में जुड़ते नहीं है। डिडक्शन को कुल इनकम में से घटाकर टैक्सबेल इनकम निकाली जाती है।


अमिताभ सिंह ने आगे कहा कि कुछ अलाउंस और डिडक्शंस के साथ शर्तें भी होती है। मिसाल के तौर पर कुछ अलाउंस सिर्फ विकलांगों के लिए होता है। चिल्ड्रेन एजुकेशन अलाउंस, एचआरए का फायदा लेने के लिए कुछ शर्तें होती है। जिसके चलते अलाउंस क्लेम करने के पहले शर्तों को जानना जरुरी होता है।


सवालः पत्नी के नाम पर एक घर है जिसके लिए बेटे ने 30 लाख रुपये का होम लोन लिया है, दूसरा घर बेचकर 55 लाख रुपये मिलेगे, इसमें से 30 लाख रुपये बेटे को और 25 लाख रुपये बेटी को देने हैं, क्या कोई टैक्स देना होगा?


अमिताभ सिंहः पहले आप पता करें कि प्रॉपर्टी पर कैपिटल गेन कितना बनता है। कैपिटल गेन टैक्स चुकाने के बाद ही आप बची रकम बांट सकते है। आप अपने बेटे और बेटी दोनों को ही रकम गिफ्ट में दे सकते है।