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टैक्स रिटर्न के आसान टिप्स, याद रखें 31 जुलाई की तारीख

प्रकाशित Mon, 25, 2016 पर 18:32  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

टैक्स रिटर्न भरने की आखिरी तारीख करीब है और ये आखिरी हफ्ता है, जब आपको अपना टैक्स रिटर्न फाइल कर देना चाहिए। अगर आप अभी भी किसी उलझन में हैं और टैक्स रिटर्न भरने से बचने का बहाना तलाश रहे हैं तो हमारी सलाह है कि आप हमारा ये शो जरूर देखें। आपकी सभी उलझनें दूर हो जाएंगी, साथ ही आपको पता लगेगा कि क्यों रिटर्न भरना आपके लिए है फायदे का सौदा। और इस काम में हमारी मदद कर रहे हैं टैक्स एक्सपर्ट शरद कोहली।


जब टैक्स रिटर्न भरने का वक्त आता है, तो साथ लाता है कई उलझनें और कई सवाल। मसलन किसके लिए है टैक्स रिटर्न भरना जरूरी, कौन सा फॉर्म है रिटर्न भरने के लिए फिट, बैंक से मिलने वाला कौन सा ब्याज होता है टैक्स फ्री, कैपिटल गेन हुआ तो किस कॉलम में दिखाएं। लेकिन अब आपको इन सवालों से डरने की जरूरत नहीं है। टैक्स रिटर्न भरने में आपकी मदद के लिए ही है ये खास शो।


हम आपको यहां बता रहे हैं कि रिटर्न फॉर्म के प्रकार कितने होते हैं। आईटीआर-1 (सहज), आईटीआर-2, आईटीआर-2ए, आईटीआर-3, आईटीआर-4, आईटीआर-4एस (सुगम), आईटीआर-5, आईटीआर-6 और आईटीआर-7 आदि रिटर्न फॉर्म हैं। रिटर्न भरने के लिए जरूरी होता है पैन, फॉर्म 16/16ए, बैंक स्टेटमेंट, एक्जेंप्ट इनकम का ब्यौरा, कैपिटल गेंस का ब्यौरा (अगर हो तो), विदेश में संपत्ति का ब्यौरा (अगर हो तो) और चल-अचल संपत्ति का ब्यौरा। चल-अचल संपत्ति का ब्यौरा, 50 लाख रुपये से ज्यादा इनकम वालों के लिए जरूरी होता है।


आईटीआर-1 की जरूरत किसे पड़ती है, सैलरी, पेंशन या ब्याज आय वालों के लिए इस रिटर्न फॉर्म को भरना पड़ता है। साथ ही एक हाउस प्रॉपर्टी से आय, 5000 तक की कृषि आय (एक्जेंप्ट इनकम) और दूसरे स्रोत से आय वाले व्यक्तियों के लिए आईटीआर-1 के तहत रिटर्न भरना होता है। आईटीआर-2ए की जरूरत सैलरी, पेंशन या ब्याज आय के अलावा कृषि आय 5000 से ज्यादा वालों को होती है। एक से ज्यादा हाउस प्रॉपर्टी और लॉटरी या घुड़दौड़ से आय होने पर आईटीआर-2ए के जरिए रिटर्न फाइल करना होता है।


वहीं आईटीआर-2ए के स्त्रोत के अलावा कैपिटल गेंस इनकम/लॉस और विदेश में संपत्ति या विदेश से आय वाले व्यक्तियों को आईटीआर-2 फॉर्म भरना होता है। टैक्स रिटर्न के मामले में एक बेहद पहलू है शेड्यूल एएल, क्या होता है ये। एएल यानि एसेट्स और लायबिलिटीज, हर रिटर्न फॉर्म में शेड्यूल एएल जोड़ा गया है। 50 लाख से ज्यादा आय वालों को इसका ब्यौरा देना होता है। शेड्यूल एएल में अपनी जायदाद और कर्ज का ब्यौरा देना होता है। शेड्यूल एएल में जमीन/घर, बैंक डिपॉजिट/नकदी, शेयर और सिक्योरिटीज, इंश्योरेंस पॉलिसी, अगर किसी को लोन दिया हो, गहने/बुलियन, आर्टवर्क, एयरक्राफ्ट/यॉट और संपत्ति जुटाने के लिए कोई कर्ज लिया हो इत्यादि जानकारियां देनी होती हैं।


बता दें कि अगर रिफंड क्लेम करना हो तो आपके ई-रिटर्न जरूरी है। साथ ही कुल इनकम 5 लाख से ज्यादा है तो आपके ई-रिटर्न भरना जरूरी है। आईटीआर-3, 4, 5, 6 और 7 भरने वालों को ई-रिटर्न जरूरी है। रिटर्न भरने से आप फायदे में ही रहोगे, क्योंकि इससे टीडीएस रिफंड का क्लेम मुमकिन होता है। लोन के लिए इनकम का प्रूफ बन जाता है। लॉस कैरी फॉरवर्ड करने के लिए रिटर्न भरना जरूरी है। साथ ही वीजा अप्लाई करने के लिए भी रिटर्न भरना जरूरी होता है।


ये भी जरूर याद रखें कि 31 जुलाई रिटर्न भरने की अंतिम तारीख है। टीडीएस कटौती हो गई हो तो भी रिटर्न भरना जरूरी है। आय 2.5 लाख से ज्यादा है तो रिटर्न भरना होगा। एक से ज्यादा प्रॉपर्टी होने पर आईटीआर-1 नहीं भर सकते हैं, एक से ज्यादा प्रॉपर्टी होने पर आईटीआर-2 भरना होगा। दूसरे स्रोतों से भी आय होती हो तो शेयर ट्रेडिंग से आय कैपिटल गेन होगी। सिर्फ शेयर ट्रेडिंग से आय होती हो तो उसे बिजनेस इनकम माना जाएगा।


टैक्स छूट के दायरे में आने वाली आय के बारे में भी जान लीजिए, 5000 रुपये से कम की कृषि आय टैक्स छूट के दायरे में आती है। ग्रैच्युटी से मिली रकम, एचआरए का टैक्स फ्री हिस्सा, पेंशन से मिली रकम, नौकरी जाने पर मिला मुआवजा, बीमा पॉलिसी से मिली रकम, निर्वाह भत्ते के तौर पर मिली एकमुश्त रकम और पीएफ मैच्योरिटी पर मिली रकम भी टैक्स छूट के दायरे में आती है।


रिटर्न भरने के लिए फॉर्म 16 या फॉर्म 16ए जरूरी है। फॉर्म 26एएस भी टैक्स रिटर्न भरने के लिए जरूरी होता है। रिटर्न भरने के लिए सेविंग्स बैंक अकाउंट नबंर, आईएफएससी कोड और सेविंग्स बैंक अकाउंट्स के स्टेटमेंट जरूरी हैं। किसी को चंदा या दान दिया हो तो उसकी रसीद जरूरी है। आधार नंबर, एक्जेंप्ट इनकम जैसे डिविडेंड, कृषि आय, कैपिटल गेन के आंकड़े और शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन के आंकड़े जरूरी होते हैं।


बता दें कि टैक्स बकाया हो तो उसे ऑनलाइन भी चुका सकते हैं, इसके लिए चालान नंबर और दूसरी जरूरी जानकारी रिटर्न फॉर्म में दें। आईटीआर दायर करने के बाद इसका वेरिफिकेशन भी बेहद जरूरी है। आईटीआर-5 पर दस्तखत कर स्पीड पोस्ट से सीपीसी, बंगलुरु भेज सकते हैं। यहां ई-वेरिफिकेशन का भी विकल्प है और आधार या नेटबैंकिंग के जरिए ई-वेरिफिकेशन मुमकिन है। ध्यान रखिए कि वेरिफिकेशन के बिना रिटर्न फाइलिंग पूरी नहीं होती है।


अगर अंतिम तारीख निकल जाए, फिर ऐसे में टैक्स बकाया हो तो पेनल्टी के साथ रिटर्न भर सकेंगे। लेकिन जितनी देर करेंगे, उतनी ज्यादा पेनाल्टी देनी पड़ेगी। टैक्स बकाया ना हो तो 31 मार्च 2017 तक रिटर्न भर सकते हैं। हालांकि अंतिम तारीख के बाद रिटर्न भरने से रिफंड मिलने में आपको देरी हो सकती है।


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