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टैक्स गुरु के साथ रिटर्न से जुड़ी उलझन करें दूर

प्रकाशित Thu, 26, 2016 पर 11:56  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

टैक्स एक ऐसा शब्द है जिसे सुनते ही आम आदमी ही नहीं जानकार भी धबराने लगते हैं। कारण है कि आयकर कानूनों में इतने सारे पेंच है कि किसी के लिए भी इन्हें समझना टेढ़ी खीर साबित हो सकती है। ऐसे ही मौकों पर टैक्स गुरू अपनी जानकारी और अनुभव का खजाना लेकर आते हैं और करते हैं टैक्स से जुड़ी मुश्किलों को दूर। आज आपके टैक्स से जुड़े मुश्किल सवालों का जवाब देंगी क्लियरटैक्स डॉट इन की प्रीति खुराना


सवालः इनकम टैक्स रिटर्न भरने का समय करीब आ  रहा है। ऐसी कौन सी बातें हैं जिनका हर टैक्सपेयर को ध्यान रखना चाहिए?


जवाब: अगर आप इंडिविजुअल हैं तो आपको 31 जुलाई तक रिटर्न फाइल करनी है। कुल इनकम 2.5 लाख रुपये से ज्यादा है तो रिटर्न भरना जरूरी है। ध्यान रखें कि टैक्स कट भी गया है तो भी रिटर्न भरना जरूरी है। आपको बता दें कि ज्यादातर मामलों में ब्याज से होने वाली आय टैक्सेबल होती है। लेकिन सेविंग्स बैंक एकाउंट पर मिलने वाला ब्याज टैक्स फ्री होता है। आपको ये भी बता दें कि एफडी, आरडी, कॉरपोरेट बॉन्ड पर मिलने वाले ब्याज को भी रिटर्न में दिखाया जाना चाहिए।


सवाल: मैं फ्रीलांस प्रोफेशनल हूं। मैने एक विदेशी कंपनी का ऑनलाइन काम कर विदेशी मुद्रा में आय प्राप्त की इस पर किस तरह से टैक्स लगेगा?


जवाब: अगर आप भारत मे रहते हैं तो दुनिया में हर कमाई पर आपको टैक्स देना होगा। टैक्स देना या न देना ये आपके रेसिडेंशियल स्टेटस पर निर्भर करता है। फ्रीलांसर होने के नाते आप अपने काम पर हुए खर्च को कमाई में से घटा सकते हैं। आपके मामले में 1500 डॉलर इनकम और 150 डॉलर का खर्च बैठता है। आप अपनी इस कमाई में दूसरे स्रोत से आय जोड़े और वाजिब टैक्स चुकाएं।


सवालः वित्त वर्ष 2015-16 में 2.05 लाख रुपये का एरियर मिला, जिसमें 10000 रुपये का ट्रासपोर्ट अलाउंस भी है। लेकिन पूरी रकम इनकम में जोड़कर उस पर 20 फीसदी टैक्स काट लिया गया, क्या रिटर्न में ट्रांसपोर्ट अलाउंस की रकम का क्लेम कर सकते हैं।


जवाब: एरियर मिलने पर सेक्शन 89(1) के तहत राहत मिलती है। राहत का मतलब है कि एक्सट्रा टैक्स नहीं देना होगा। लेकिन मिली रकम पर आपको वाजिब टैक्स चुकाना होगा। आपको गणना करनी होगी कि आप पर टैक्स बकाया है कि नहीं। सेक्शन 89(1) के तहत राहत के लिए आपको फॉर्म 10 ई भरना होगा।


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