Moneycontrol » समाचार » टैक्स

टैक्स गुरुः क्यो जरुरी है इंश्योरेंस और टैक्स प्लानिंग

प्रकाशित Fri, 29, 2016 पर 17:25  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

टैक्स एक ऐसा शब्द है जिसे सुनते ही आम आदमी ही नहीं जानकार भी घबराने लगते हैं। कारण है कि आयकर कानूनों में इतने सारे पेंच है कि किसी के लिए भी इन्हें समझना टेढ़ी खीर साबित हो सकती है। ऐसे ही मौकों पर टैक्स गुरू अपनी जानकारी और अनुभव का खजाना लेकर आते हैं और करते हैं टैक्स से जुड़ी मुश्किलों को दूर। आज आपके टैक्स से जुड़े मुश्किल सवालों का जवाब देंगे सक्षम वेंचर्स के फाउंडर अमिताभ सिंह और एलआईसी मुंबई डिवीजन के सीनियर डिवीजनल मैनेजर विवेक पॉल।


एलआईसी मुंबई डिवीजन के सीनियर डिवीजनल मैनेजर विवेक पॉल का कहना है कि सिर्फ टैक्स बचाने के मकसद से इंश्योरेंस पॉलिसी लेना गलत होता है। इंश्योरेंस कम उम्र में खरीदना चाहिए। क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ इंश्योरेंस पॉलिसी का प्रीमियर बढ़ता है। जितनी जल्दी हो बीमा पॉलिसी लेना बेहतर होता है। साथ ही समय - समय पर बीमा पॉलिसी की समीक्षा भी करते रहनी चाहिए।


इंश्योरेंस पॉलिसी लेते वक्त परिवार में कितने लोग आप पर निर्भर है। आपकी जीवनशैली कैसी है। बच्चों की पढ़ाई, शादी जैसे खर्च और कितनी बड़ी पॉलिसी ले सकते है इन बातों का ध्यान में रखें।


इन्वेस्टमेंट और इंश्योरेंस को ना मिलाने की दलील कुछ हद तक सही होती है। इंश्योरेंस को एसेट बिल्डिंग की स्टैटेजी के तौर पर देख सकते है। कैपिटल सिक्योरिटी के लिहाज से एंडाउमेंट इंश्योरेंस पॉलिसी बेहतर होती है।


भारत सरकार की तरफ से इनकम टैक्स प्रोविजन होते है उसमें जो प्रीमियम भर रहे है वो अलग- अलग प्रोविजन के तहत टैक्स रिडेडेबल रहता है। और बीमा खुद के लिए, माता- पिता के लिए ले सकते है। परिवार के भविष्य के लिए इंश्योरेंस पॉलिसी जरुरी होता है। जिसे देखते हुए जितनी जल्दी हो, उतनी जल्दी खरीदना चाहिए। सालाना आय के 10-20 गुना इंश्योरेंस होना चाहिए।


टैक्स एक्सपर्ट अमिताभ सिंह का कहना है कि टैक्स बचाने के के लिए से इंश्योरेंस पॉलिसी लेना गलत होता है। रिस्क कवर को ध्यान में रखकर बीमा पॉलिसी लें। अपने लायबिलिटीज का सही तरह से आकलन करें। टर्म  इंश्योरंस प्लान सिर्फ रिस्क कवर के साथ मिलता है। मैच्योरिटी पर कोई रकम वापस नहीं होता। इसमें पॉलिसी होल्डर की मौत होने पर नॉमिनी को बीमा की रकम मिलती है।


एंडाउमेंट इंश्योरंस प्लान रिस्क कवर के साथ इन्वेस्टमेंट भी देता है। प्रीमियम का कुछ हिस्सा निवेश होता है। साथ ही मैच्योरिटी के वक्त एकमुश्त या एन्युटी के रुप में रकम मिलती है।


वीडियो देखें