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योर मनीः टैक्स के बोझ से खाने का बिल भारी

प्रकाशित Sat, 30, 2016 पर 11:56  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

मंहगाई आपकी जेब पर भारी पड रही है, फिर चाहे वो किचन का बजट हो या फिर बाहर खाने पिने का। एक तो फल सब्जियों के दाम आसमान पर हूं, दूसरा, खाने के बिल पर लगने वाले टैक्स आपकी जैब काट देते हैं। फल सब्जियों की कीमतों का आप कूछ नही कर सकते लेकिन बाहर खाने के बिल को आप कैसे कंट्रोल कर सकते हैं, इसी पर आज होता योर मनी का फोकस। आज हमारे साथ चर्चा में शामिल हैं वाइजइन्वेस्ट एडवाइजर्स के हेमंत रुस्तगी और फाइनेंशियल प्लानर अर्णव पंड्या।


वाइजइन्वेस्ट एडवाइजर्स के हेमंत रुस्तगी का कहना है कि रेस्टोरेंट सर्विस देने के लिए पैसा लेते हैं। सर्विस चार्ज सरकार तय नहीं करती है। सर्विस चार्ज 4-12 फीसदी तक हो सकता है। सर्विस टैक्स केंद्र सरकार वसूलती है। सर्विस टैक्स की दर 14 फीसदी है। सर्विस टैक्स पर 0.5 फीसदी स्वच्छ भारत सेस और 0.5 फीसदी कृषि कल्याण सेस के लिए लिया जाता है। सिर्फ एसी रेस्टोरेंट में सर्विस टैक्स लगता है। पूरे बिल पर सर्विस टैक्स नहीं लगता है। बिल के 40 फीसदी हिस्से पर ही सर्विस टैक्स लगता है। सर्विस टैक्स कुल बिल का 5.6 फीसदी होता है। स्वच्छ भारत, कृषि कल्याण सेस की प्रभावी दर 0.20 फीसदी होता है। सेस मिलाकर कुल सर्विस टैक्स बिल का 6 फीसदी होता है।


फाइनेंशियल प्लानर अर्णव पंड्या का कहना है कि मैन्यू के प्राइज वेट लग रहा है या नहीं इसे जरुर देखना चाहिए। रेस्टोरेंट वैल्यू एडिशन के लिए वेट वसूलते हैं। वेट की दर राज्य तय करते हैं। सर्विस चार्ज पर भी वेट लग सकता है। सिर्फ एसी रेस्टोरेंट में सर्विस टैक्स लगता है। पूरे बिल पर सर्विस टैक्स नहीं लगता। बिल के 40 फीसदी हिस्से पर ही सर्विस टैक्स लगता है।


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