पश्चिम बंगाल के उत्तरी कोलकाता की शिमला स्ट्रीट पर इस समय राजनीति का पारा अपने चरम पर है। स्वामी विवेकानंद की जयंती के मौके पर लगे राजनीतिक पोस्टरों ने माहौल को पूरी तरह गर्म कर दिया है। एक तरफ तृणमूल कांग्रेस के अखिल भारतीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को 'युवराज' बताने वाला पोस्टर लगा है, वहीं, दूसरी ओर शुवेंदु की ओर से 'हिंदू' पोस्टर लगाए गए हैं। इन दोनों पोस्टरों को लेकर इलाके में जबरदस्त राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।
इसी बीच सोमवार को अभिषेक बनर्जी ने भाजपा और मीडिया दोनों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा, "आने वाले चुनावों से पहले एक इंच भी जमीन छोड़ी नहीं जा सकती, क्योंकि अगर थोड़ी सी भी जगह भाजपा को मिल गई तो वह जनता को गुमराह कर देगी।"
इसके साथ ही अभिषेक ने मीडिया को भी कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा, "पहले मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता था, लेकिन अब वही मीडिया भाजपा के जुलूस में शामिल नजर आता है। आगे उन्होंने कहा, "भाजपा जो दिखाना चाहती है, मीडिया वही दिखाता है, लेकिन ममता बनर्जी सरकार के विकास कार्यों को जानबूझकर नजरअंदाज किया जाता है। व्यंग्य करते हुए उन्होंने कहा कि, "अगर बर्फ पिघलकर पानी बन जाए, आसमान में कोहरा छा जाए, प्याज का आकार छोटा हो तो ममता जिम्मेदार है, अगर अचानक बारिश हो जाए, सर्दी और गर्मी बढ़ जाए तो ममता जिम्मेदार है।"
अभिषेक ने साफ कहा कि इस वजह से अब तृणमूल कांग्रेस अपना प्रचार डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के जरिए करेगी। उन्होंने पार्टी के समर्थकों को 'डिजिटल योद्धा' बताते हुए कहा कि अगर टीवी चैनल या अखबार सच्चाई नहीं दिखाते, तो सोशल मीडिया के जरिए जनता तक सही बात पहुंचाई जाएगी।
वहीं दूसरी ओर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार और विपक्ष के नेता शुवेंदु अधिकारी ने भी इस मौके को राजनीतिक हथियार बना लिया। सुकांत मजूमदार स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने पहुंचे और वहीं से अभिषेक को 'युवराज' कहे जाने पर कटाक्ष किया। उन्होंने अभिषेक पर व्यंग करते हुए कहा, "युवराज आएंगे, वे बंगाल के राजपरिवार का हिस्सा हैं। हमें इससे क्या लेना-देना, हम तो प्रजा हैं। इसीलिए मैं पहले गया और माला पहनाई। स्वामीजी, कम से कम पहले किसी ईमानदार व्यक्ति के ही माला पहने। वरना ये चोर माला पहनते, कोयले की तस्करी, गायों की तस्करी में शामिल लोग, वे माला पहनाएंगे।
आगामी बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले यह विवाद इस बात का संकेत है कि राज्य में मुकाबला कितना तीखा होने वाला है। तृणमूल कांग्रेस जहां खुद को विकास और धर्मनिरपेक्षता बता रही है, वहीं भाजपा हिंदू पहचान और भ्रष्टाचार के मुद्दे को लेकर मैदान में उतर चुकी है।