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by Roopali Sharma | jan 30,  2025

आयुर्वेद की शक्ति के साथ, स्किन की हर प्रॉब्लम को करे दूर हमेशा के लिए

आयुर्वेद के अनुसार आपकी स्किन आपके इंटरनल हेल्थ का दर्पण है, जब बोडी के दोषों में इम्बैलेंस होता है, तो वह स्किन पर दिखाई देने लगता है:

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अपनी स्किन के टाइप को समझें, ड्राई स्किन सेंसेटिव और रेडनेस वाली पित्त, और ओयली स्किन कफ बैलेंस का संकेत है

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दोषों की पहचान

डाइजेशन से टोक्सिन बनते हैं, जो ब्लड को दूषित कर मुंहासे पैदा करते हैं, हेल्दी डाइजेशन ही चमकती स्किन की नींव है

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डाइजेशन पर फोकस

स्किन प्रोब्लम के लिए नीम, मंजिष्ठा और हल्दी जैसी जड़ी-बूटियों का यूज करें, कुछ प्रोडक्ट में इन प्यूरीफीइंग इंग्रीडिएंट का यूज किया जाता है

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ब्लड पूरीफिकेशन

मौसम से अपनी रूटीन बदलें, विंटर में पित्त शांत करने वाले कोल्ड फूड और विंटर में वात कम करने वाले तेल मालिश का यूज करें

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सीजनल रूटीन

ताज़ा, ओर्गेनिक और मौसमी फल-सब्जियों का सेवन करें, प्रोसेस्ड और ज्यादा तीखे भोजन से बचें जो इंटरनल हीट बढ़ाते हैं

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सात्विक आहार

तिल या नारियल तेल से रेगुलर मालिश करने से ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है और लिम्पेथिक सिस्टम साफ होता है

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तेल की मालिश

केमिकल के बजाय चंदन, मुल्तानी मिट्टी और गुलाब जल जैसे नेचुरल उबटन का यूज करें, पर आयुर्वेदिक फेस मास्क के ओप्शन देख सकते हैं

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नेचुरल लेप

मेंटल स्ट्रेस पित्त को बढ़ाता है, इसलिए योगा और मेडिटेशन से मन को शांत रखना स्किन के लिए जरुरी है

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स्ट्रेस मैनेजमेंट

समय-समय पर ‘पंचकर्म’ जैसी प्रोसीजर से शरीर से टोक्सिन्स बाहर निकालें, आप अनुभवी डाक्टरों के लिए आयुर्वेद की सलाह ले सकते हैं

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डेटोक्सिफिकेशन

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